आधार लिंक होते ही 31,902 उपभोक्ता गायब
मुजफ्फरनगर।
जिले के शहरी क्षेत्रों में ईपीओएस मशीनों के माध्यम से राशन वितरण होते ही 31,902 उपभोक्ता गायब हो गए हैं। राशन की दुकानों पर चल रहे फर्जीवाड़े को मशीन ने पकड़ लिया है। अब किसी भी शहरी उपभोक्ता को बिना मशीन पर अंगूठा लगाए सस्ते गल्ले का राशन नहीं मिल पाएगा। इसमें अच्छी बात यह है कि उपभोक्ता से दुकानदार जो पैसा लेगा, मशीन उस पैसे की रसीद भी ग्राहक को देगी। मूल्य में भी हेराफेरी नहीं हो पाएगी।
प्रदेश सरकार ने जिले की सभी दस निकायों की राशन की दुकानों पर ईपीओएस मशीनें लगवा दी हैं। मुजफ्फरनगर शहर में राशन की 111 दुकाने हैं, इनमें छह का अटैचमेंट चल रहा है। राशन 105 दुकानों पर ही दिया जा रहा है। इन सभी पर ईपीओएस मशीनें लगा दी गई हैं। बुढ़ाना, शाहपुर और सिसौली में 25 दुकानें हैं। इन सभी पर भी मशीनों से राशन वितरण शुरू हो गया है। खतौली में 22 दुकानें हैं, दो दुकानों का अटैचमेंट है। सभी कार्यरत 20 दुकानों पर मशीनें लगा दी गई हैं। पुरकाजी और चरथावल की सभी 14 दुकानों, जानसठ, मीरापुर और भोकरहेड़ी की सभी 18 दुकानों पर ईपीओएस मशीन लग चुकी है। उपभोक्ताओं को अब राशन का सामान लेने के लिए मशीन पर अपना अंगूठा लगाना होता है। आधार कार्ड से लिंक होते ही राशन का सामान दे दिया जाता है। मशीन दिए जाने वाले सामान की कीमत की रसीद भी निकालती है, जो उपभोक्ता को दी जाती है। दुकानदार रेट में भी कोई हेराफेरी नहीं कर पाएगा। जिले की सभी दस निकायों में 184 राशन की दुकानों के 91,150 उपभोक्ताओं को ईपीओएस के माध्यम से ही राशन दिया जा रहा है। मशीन से राशन शुरू होते ही बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। दिसंबर और जनवरी में कुल 91,150 उपभोक्ताओं में से केवल 65 प्रतिशत 59,248 उपभोक्ताओं ने ही राशन लिया है। 35 प्रतिशत 31,902 उपभोक्ता ऐसे हैं, जो रुटीन में सस्ते गल्ले का राशन नहीं लेते हैं। इनका राशन दुकानदारों के पेट में जा रहा था। अब सीधा लाभ सरकार को होगा। डीएसओ ध्रुव कुमार का कहना है कि ईपीओएस मशीन के माध्यम से जो राशन वितरण होता है, उसकी मॉनिटरिंग सीधे लखनऊ से होती है। दुकानदारों को आगामी माह में अब 35 प्रतिशत कम खाद्यान्न और केरोसिन मिलेगा। मशीनों ने राशन की चोरी रोकने के साथ ही मूल्य में हेराफेरी भी रोक दी है। रसीद मशीन तुरंत देती है।
फरवरी से ग्रामीण क्षेत्र में अभियान
मुजफ्फरनगर। डीएसओ ध्रुव कुमार का कहना है कि ईपीओएस मशीनों से ग्रामीण क्षेत्र में भी राशन वितरण होगा। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में खतौली के मढ़करीमपुर और बुढ़ाना के गढ़ी नौआबाद गांव की दुकानों पर मशीन लगा दी गई है। फरवरी माह से सरकार ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों पर भी ये मशीनें देने जा रही है। जिले में कुल 911 राशन की दुकानें हैं। ग्रामीण क्षेत्र की 721 दुकानों पर अब अभियान चलाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की सभी दुकानों पर मशीनें लग चुकी हैं।
राजनीति का अखाड़ा बनी थी अवैध कमाई
मुजफ्फरनगर। राशन की एक दुकान पर 30 से लेकर 50 हजार तक की कमाई गांवों में राजनीति का अखाड़ा बनी थी। फर्जी राशन कार्ड कमाई का बड़ा आधार थे। आधार कार्ड के माध्यम से राशन वितरण होने से गांवों में राशन की दुकानों को लेकर होने वाली राजनीति भी गायब हो जाएगी। कभी-कभी रंजिश का कारण भी ये दुकानें बनती थी।