गन्ने की पर्चियों के हेराफेरी में वेंडर भी शामिल
मुजफ्फरनगर। गन्ना विभाग में पर्चियों के हेरफेर में वेंडर भी शामिल है। पर्ची जारी करने का काम निजी कंपनियों के हाथों में है, समितियों, चीनी मिलों और माफिया के साथ मिलकर बड़ा खेल होता है। पर्ची घोटाला सामने आने के बाद एक कंपनी किरण कंप्यूटर को ब्लैक लिस्टेड किया गया है, इसकी जांच चल रही है।
पर्ची के घोटाले में तकनीकी का सहारा भी लिया गया है। पर्ची जारी करने वाली कंपनी के शामिल हुए बिना बड़े स्तर पर अलग से घोटाला नहीं हो सकता। चीनी मिल से मिलीभगत कर वेंडर्स कुछ किसानों को मनमर्जी से अलग से पर्ची जारी कर देते हैं। दस बीघा के किसानों को साढ़े तीन हजार क्विंटल गन्ने तक की पर्ची जारी कर दी गई। पर्चियों में बीते सत्र में रोहाना और मोरना में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ। किसानों की शिकायत इन दोनो समितियों की पर्ची बना रही किरण कंप्यूटर कंपनी को इस बार ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। इस बार जिले में गन्ना समितियों की पर्ची बनाने का काम तीन निजी कंपनी देख रही है। इनमें सेल सिस्टम मेरठ, सैल कंप्यूटर्स सहारनपुर, कोर इंडिया मेरठ पर्ची बना रही है। सैल सिस्टम मेरठ के पास चार गन्ना समिति मंसूरपुर, खतौली, रोहाना और तितावी है। सैल कंप्यूटर्स सहारनपुर के पास बुढ़ाना और कोर इंडिया मेरठ के पास मोरना और रामराज गन्ना समिति है। इन कंपनी की मिलीभगत से चीनी मिलों को अतिरिक्त पर्ची जारी होती है। गन्ना विभाग को पर्ची घोटाला रोकने के लिए इन निजी वेंडर्स पर ध्यान देना होगा। इस संबंध में डीसीओ आरडी द्विवेदी का कहना है कि सरकारी प्रक्रिया में टेंडर छोड़कर पर्ची का काम दिया गया है। विभाग पर्चियों को लेकर इस बार सतर्क है। किरण कंप्यूटर पर कार्रवाई के बाद जांच चल रही है।