संत ने गंगा में स्नान कर आमरण अनशन समाप्त किया
मोरना (मुजफ्फरनगर)।
संत समाज को सम्मान नहीं मिलने, देश में राम राज्य स्थापित नहीं होने व गोहत्या न रोक पाने, हिंदू संस्कृति की रक्षा नहीं होने से खिन्न दंडी स्वामी कृष्ण आश्रम महाराज ने शुक्रताल गंगाघाट पर आमरण अनशन कर प्राण त्यागने का आह्वान कर दिया। इससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसडीएम गजल भारद्वाज व तहसीलदार पुष्कर नाथ चौधरी ने संत को मनाने पहुंचे। नगर के साधु संतों ने भी संत को मनाने में जुट गए। घंटों बाद गुरु स्वामी सत्यदेव आश्रम महाराज के आदेश पर संत ने आमरण अनशन गंगा में स्नान करने के बाद समाप्त किया।
पौराणिक तीर्थ नगरी स्थित शुक्रताल के गंगा घाट पर हरियाणा के कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरावेर प्राचीन वट वृक्ष के नीचे वर्षों से साधना करने वाले ब्रह्म मुहूर्त में बृहस्पतिवार सुबह छह बजे 72 वर्षीय स्वामी कृष्ण आश्रम महाराज की जल समाधि लेने की सूचना पर प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर थाना भोपा प्रभारी विजय सिंह सहित महामंडलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज, स्वामी नरेशानंद महाराज, मनोहर शर्मा, विनोद शर्मा चेयरमैन, प्रधान सुशील, सुरेंद्र चौधरी, डा. राजेंद्र, लोतीराम, विपिन ने संत को मनाने का प्रयास शुरूकर दिया। हालांकि हटयोगी के नाम से संत ने सबको कागज पर लिखकर अकेला छोडक़र जाने का आग्रह करते हुए अपने प्रण से हटने से मना कर दिया। वहीं, शुक्रताल आए संत के पुत्रवधू सुनीता पत्नी सुशील व नमीशा पत्नी गोपाल शर्मा ने बताया कि हरियाणा के जिला कैथल के सिरसल गांव में संत का परिवार रहता है, जो अब हाल में करनाल में रहता है। श्रीनारायण आश्रम शीशाना, सोनीपत के स्वामी गोपालदास महाराज व पानीपत के सेक्टर 11-12 के रोडी साहब गुरुद्वारा के बाबा जगमेंद्र दास के साथ शुक्रताल में संत कृष्ण महाराज को मनाने के लिए आए हुए। संत ने किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं हुए। वहीं, दंडी आश्रम के मनोहर शर्मा ने बताया कि आश्रम में रहने वाले दंडी स्वामी सत्यदेव आश्रम से संत कृष्ण आश्रम महाराज ने कई वर्षों से दीक्षा लेकर साधना करते रहे हैं। बृहस्पतिवार की सुबह संत अपने गुरु को कमंडल देकर गंगा घाट पर जाकर आमरण अनशन कर शरीर को त्यागने की घोषणा कर दी। छह घंटों के बाद गुरु के कहने पर हटयोगी बाबा ने अपने आमरण अनशन को त्यागकर गंगा में स्नान करने के बाद दंडी आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी गुरुदत्त महाराज से मिलकर उनका सानिध्य प्राप्त किया, तब कहीं जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
स्वामी कृष्ण आश्रम महाराज ने बताया कि यदि हम सभी पाप क्रम छोड़ दें, तो सरकार घुटनों में आ जाएगी। राजा से राजा बनना बड़ा कठिन काम है। प्रजा से राजा बनना सरल काम है। सरकार कहती है राम राज्य लाना है। ये तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। भारत देश के अंदर समस्या नहीं है, सरकार ने कर रखी है। यदि आप पाप कर्म को छोड़ दें तो जनता आपकी सरकार बन जाएगी। रामराज्य के लिए रामबाण के सूत्र को हर हाल में मानना होगा, तभी कल्याण होगा।