भाजपा को हराने के लिए चुनी कांग्रेस
मुजफ्फरनगर। निकाय चुनाव में मुस्लिमों का सीधा रुख भाजपा को हराने वाले प्रत्याशी की तरफ रहा। परिणाम में चौंकाने वाली बात यह है कि सपा का परंपरागत वोट बैंक खतौली पालिका को छोड़कर अन्य जगह पर साथ नहीं दे सका, जबकि पहली बार निकाय चुनाव में उतरी बसपा भी दलित-मुस्लिम फैक्टर साधने में नाकाम रही।
सपा का परंपरागत वोट बैंक कहे जाने वाले मुस्लिम वोटरों का मिजाज निकाय चुनाव में बदल गया। मतदान पर खामोश रहने वाले मुस्लिम वोटरों ने परिणाम में चौंका दिया। मुस्लिमों ने सीधे टारगेट इस बार भाजपा को हराने वाले प्रत्याशी को किया। भाजपा को हराने वाला प्रत्याशी निर्दलीय हो या सियासी दल रहा, मुस्लिम वोटरों ने खुलकर उसकी झोली में वोट डाली है। शहर में सपा से छिटका मुस्लिम वोटर कांग्रेस के पक्ष में रहा है। पालिका के चुनाव में जो परिणाम सामने आया है, उसमें 70 से 80 प्रतिशत मुस्लिमों ने पंजे पर मुहर लगाई, जिसके चलते सपा की मिथलेश पाल को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वहीं, बसपा ने मुस्लिम चेहरा मुदस्सिर पर दांव खेला, लेकिन दलित-मुस्लिम फैक्टर साधने में प्रत्याशी नाकाम रही। मुदस्सिर चौथे पायदान पर रहीं।
वहीं, खतौली पालिका में मुस्लिम वोटरों ने सपा का दामन नहीं छोड़ा। यहां भी भाजपा को हराने के लिए बिलकिस बानो को वोट किया, जबकि मीरापुर नगर पंचायत में सियासी दलों की सबसे अधिक दुर्गति हुई है। यहां पर मुस्लिम वोटरों ने सपा, बसपा को दरकिनार कर भाजपा को हराने वाले मजबूत प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया। हालात ऐसे बने कि भाजपा प्रत्याशी यहां फाइट में भी नहीं आ सकी। सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुस्लिम वोटर बंट गए। पुरकाजी में भी उम्मीदों के सापेक्ष मुस्लिम वोटरों ने राजनीतिक दलों से दूरी बनाई। यहां पर निर्दलीय जहीर फारूकी को जिताने का फैसला किया। बुढ़ाना में मुस्लिमों ने कांग्रेस का पंजा थामा, लेकिन जीत भाजपा प्रत्याशी बाला त्यागी को मिली। जानसठ में भी मुस्लिम वोटरों ने सपा का साथ छोड़ते हुए निर्दलीय प्रत्याशी आबिद के पक्ष में वोट किया। मुस्लिमों का रुझान बदलने से सियासी दलों की बेेचैनी बढ़ गई है। निकाय चुनाव का परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव पर भी प्रभाव डालेगा।