अभिनेता नवाजुद्दीन ने कड़े संघर्ष के बाद पाई कामयाबी
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। इतना आसान नहीं होता कामयाबी का मिलना, उसके लिए किस्मत से लड़ना पड़ता है। सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी पर यह लाइन सटीक बैठती है। बुलंदियों को छूने के लिए बंदूकबाज बाबू मोशाय ने कड़ा संघर्ष किया है। पहले ड्रामा, थियेटर में खुद को तपाया है। वर्ष 2012 में आई विद्या बालन अभिनीत फिल्म कहानी से नवाजुद्दीन की किस्मत पलट गई। कहान से किस्मत के दरवाजे खुले और नवाजुद्दीन को शोहरत की बुलंदिया मिल गई।
बुढ़ाना में शिक्षा के लिए कोई खास प्रबंध नहीं थे। मन में पढ़ने की लगन के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद एमएससी करने के लिए वह गुजरात के बड़ौदरा विवि चले गए। यहां पर पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए एक फैक्ट्री में मैनेजर के रूप में कार्य किया। मन में कुछ और था, इसलिए गुजरात में ही थियेटर की दुनिया की ओर मुड़ गए। यहां पर अभिनेता के गुर सीखे, उसके बाद नेशनल ड्रामा इंस्टीट्यूट में एक्टिंग की पढ़ाई की। एक्टिंग की पढ़ाई के बाद मुंबई का रुख किया, लेकिन किस्मत का हर दांव उनके खिलाफ गया। करीब 13 साल लंबा संघर्ष किया। छोटे-मोटे रोल किए। वर्ष 2012 में सुजाय घोष निर्देशित फिल्म कहानी ने उनकी किस्मत बदल दी। कहानी में विद्या बालन के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म में उन्होंने इंस्पेक्टर खान की भूमिका निभाई, जो सिनेमा जगत में एक मिसाल बन गई। यहीं से नवाजुद्दीन को शोहरत मिली और मंजिल आसान होती चली गई। अब बॉलीवुड के बंदूकबाज बाबुमोशाय फलक पर जलवा बिखेर रहे हैं।
दबंग खान से पहले आमिर संग काम
मुजफ्फरनगर। बॉलीवुड के बंदूकबाज ने खान तिगड़ी में सबसे पहले वर्ष 1999 में आमिर खान के साथ फिल्म सरफरोश में काम किया। इसके बाद खान लिस्ट में वह बॉलीवुड के दबंग खान सलमान खान के साथ बजरंगी भाईजान में काम कर अपनी छाप छोड़ चुके हैं, जबकि शाहरुख के साथ रहीस फिल्म में इंस्पेक्टर के रोल में नजर आए। इनके अलावा किक, फिकरी अली, गैंग्स ऑफ वासेपुर, हरामखोर, रमन राघव, बदलापुर, दशरथ मांझी, मॉम, लंच बॉक्स आदि कई हिट फिल्मों में काम चुके हैं।