मुजफ्फरनगर में ग्राम पंचायत चुनाव में शनिवार को प्रथम चरण का मतदान संगीनों के साए में हुआ। कड़ी चौकसी के बीच 73 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। पुरकाजी ब्लाक में 74 और सदर ब्लाक में 72 प्रतिशत वोट पड़े। प्रशासन की ऐसी व्यवस्था थी कि हर बूथ पर फोर्स नजर आई। चुनाव में खून खराबे की आशंका को देखते हुए प्रशासन सक्रिय रहा।
ग्राम पंचायत का चुनाव जिला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। प्रथम चरण में सदर ब्लाक के 53 गांवों और पुरकाजी ब्लाक के 43 गांवों में मतदान हुआ। मतदान को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। मतदान निर्धारित समय सात बजे शुरू हो गया। गांवों में प्रत्येक बूथ पर अच्छी खासी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। संवेदनशील गांवों में सेक्टर मजिस्ट्रेट से लेकर जोनल मजिस्ट्रेट तक डेरा डाले रहे।
सदर ब्लाक के बिलासपुर और शेरनगर में प्रशासन ने ड्रोन कैमरों की व्यवस्था की थी। हर दस मिनट बाद बूथ पर अधिकारी पहुंच रहे थे। सुबह से ही मतदाताओं में वोट डालने को लेकर भारी उत्साह रहा। गांवों के मतदान केंद्रों पर वोटरों की कतार लगी रही। सरवट गांव के मतदान केंद्र बारातघर पर एजेंटों के पास मोबाइल होने पर पुलिस ने उन्हें जमकर हड़काया।
पुलिस ने शेरनगर, संधावली और बारातघर से गड़बड़ी करने वाले कुछ एजेंटों को हिरासत में भी लिया, जिन्हें चुनाव बाद छोड़ दिया। पुलिस और प्रशासन का यह पूरा प्रयास रहा कि किसी भी गांव में एक स्थान पर भीड़ एकत्र न हो। प्रशासन का ध्यान सदर ब्लाक पर ही ज्यादा रहा। पुरकाजी ब्लाक को जिले का सबसे शांत ब्लाक समझा जाता है। इस चुनाव में भी इस ब्लाक के गांवों ने यह साबित कर दिया।
पुरकाजी ब्लाक के किसी भी गांव में किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई। चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण हुआ। प्रशासन का पूरा ध्यान सदर ब्लाक पर था। सदर ब्लाक के गांवों में अधिकारियों का पूरा जाल िछाया गया था। संधावली में घटना के बाद वहां अधिकारियों की फौज एकत्र हो गई।
ज्यादातर गांवों में सुबह सात से नौ बजे तक मतदाताओं की कतारें रहीं। नौ बजे के बाद प्रत्याशियों ने खुद वोटरों को ढूंढना शुरू किया। अंतिम समय साढ़े चार बजे तक प्रत्याशियों ने पूरे जोर लगाए। वोटरों को बूथों तक पहुंचाने का काम किया।