दुख सहन करके भगवान की भक्ति करना ही तप : महाराज
मोरना। शुकतीर्थ में मां बगलामुखी पीतांबरा धाम में जयंती महोत्सव के समापन पर स्वामी सचिन्नानंद महाराज ने कहा कि दुख सहन करके भगवान की भक्ति करना, इसी का नाम तप है। मौन रहना तप है, भूख और प्यास सहना तप है। तन और मन को थोड़े विवेक से सुख दो। अति सुख देने से शरीर बिगड़ जाएगा।
महाराज ने कहा कि जो भगवान की स्तुति करता है, दुख में भगवान उसको ऐसी शक्ति देते हैं कि दुख का असर उनके मन पर नहीं होता है। परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए बहुत ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं। जो बहुत पढ़ा है, वह चमत्कार के बिना नमस्कार नहीं करता है। जो पढ़ा नहीं है, वह सबको नमस्कार करता है। चमत्कार के बिना नमस्कार यही सच्ची मानवता है। चमत्कार के बाद नमस्कार यह अभिमान है, संत कभी चमत्कार नहीं करते हैं। संत उसको कहते हैं, जिसको भगवान का आनंद मिला हो। परमात्मा का आनंद जिसको मिला हो, उसको संसार का आनंद तुच्छ लगता है। इस मौके पर मां बगलामुखी मंदिर में स्वामी डा. अयोध्या प्रसाद महाराज, स्वामी भजनानंद महाराज, स्वामी राधिकादास महाराज, स्वामी गोवर्धन महाराज, स्वामी अमितानंद महाराज, स्वामी सत्यानंद महाराज, स्वामी योगेशानंद महाराज, वैद्य जगपाल, स्वामी शहजानंद महाराज सहित श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजा अर्चना की। इस दौरान वीके शर्मा, प्रदीप, विनोद, सुरेश सिंह, विरेंद्र चोधरी, मधु शर्मा, नवीन गर्ग, दीपक गुप्ता, देवेंद्र त्यागी प्रधानाचार्य, बालमुकुंद, राकेश द्विवेदी, लतादेवी उपस्थित रहे।