परमात्मा की आराधना का श्रेष्ठ माध्यम है यज्ञ
शाहपुर। कस्बे में चौधरी हरिराम आर्य की पुण्यतिथि के अवसर पर देश में सुख-शांति के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि यज्ञ परमात्मा की आराधना का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। यज्ञ, योग और यज्ञोपवीत हमारी संस्कृति है ।
कस्बे के आरडी आर्य पब्लिक स्कूल में चौधरी हरिराम आर्य की 44वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर देश में सुख-शांति की कामना के लिए आयोजित यज्ञ में कस्बे व देहात के लोगों ने आहुति दी। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेदों का पढ़ना व पढ़ाना, सत्य का धारण करना प्रत्येक आर्य का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जीवन जीने का सार व ज्ञान-विज्ञान सब वेदों में निहित है। भारतीय संस्कृति वेदों के आधार पर चलती है। उन्होंने कहा कि यज्ञ, योग और यज्ञोपवित भारतीय संस्कृति है । युवा यज्ञ के साथ वेदों से जुड़कर अपना जीवन सफल बनाएं। आर्य विद्वान सत्यकांत शास्त्री ने कहा कि अंधकार में भटके हुए मनुष्यों को वेदों के प्रति जागरूक करना सबका कर्तव्य है। यज्ञ के उपरांत भजनोपदेशक नरेश निर्मल ने वेदों के महत्व पर भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान डॉ सत्यवीर आर्य , महावीर सिंह आर्य, रणवीर सिंह आर्य, देवराज आर्य, नरेश बालियान, सतेंद्र प्रधान, अनुज अग्रवाल, राजीव सैनी, विजय बंसल, उमेश मित्तल, ब्रह्मपाल सिंह किंकर, मांगेराम सैनी आदि मौजूद रहे। संचालन विक्रम सिंह आर्य ने किया ।