मुजफ्फरनगर। राशन घोटाले में लखनऊ एनआईसी के जुड़े होने का मामला भी सामने आ रहा है। एक राशन कार्ड का नंबर लेने के लिए सामान्य रुप से 24 घंटे एनआईसी में लगते हैं। ई-पॉश मशीन के माध्यम से राशन वितरण के दौरान एक-एक मिनट में एनआईसी से नए नंबर कैसे मिल गए घोटाले में डाटा ऑपरेटर के साथ, डीलर्स और पूर्ति निरीक्षक भी घेरे में आ रहे हैं। इन पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
राशन वितरण घोटाले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। जो परिदृष्य और तथ्य सामने आ रहे हैं, उसके अनुसार बिना एनआईसी के ये घोटाला हो ही नहीं सकता था। ई-पॉश मशीन डायरेक्ट लखनऊ से संचालित हो रही है। राशन कार्ड का सभी काम ऑनलाइन हो रहा हैं। आधार कार्ड और अन्य कागजों की पूर्ति करने के बाद राशन कार्ड इशू होने में 24 घंटे से ज्यादा लग जाता है। ई-पॉश मशीन के माध्यम से जिन आधार नंबरों पर नए राशन कार्ड जनरेट कर दिए गए उनका नंबर एक-एक मिनट बाद कैसे जारी हो गया। पूरी प्रक्रिया लखनऊ से होती है। इससे यह साबित हो रहा है कि प्रक्रिया में मुजफ्फरनगर से लेकर लखनऊ तक एक बड़ी चेन है।
अभी तक पूरे मामले में जो सामने आए हैं उनमें वे पूर्ति निरीक्षक जिनके कोड से ई-पॉश मशीनें संचालित की गईं, राशन डीलर्स और डाटा ऑपरेअर मुख्य है। सरकार ने जिस तरह प्रदेश स्तर की एजेंसी को जांच सौंपी है, इससे इस प्रकरण में इन सभी लोगों पर गाज गिरना निश्चित है। जिला स्तर पर अब तक उन सभी 64 कार्ड धारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई, जो इस खेल में शामिल हैं। तीन डाटा ऑपरेटर के खिलाफ तहरीर दी गई है। अब डीलर्स और पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ मुकदमा लिखाने की तैयारी है। जिला पूर्ति अधिकारी सुनील पुष्कर का कहना है कि शासन से जो निर्देश मिल रहे हैं, उनके आधार पर कार्रवाई हो रही है।