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सीता विदाई की कथा सुन श्रोताओं की आंखे नम

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सीता विदाई की कथा सुन श्रोताओं की आंखें नम
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मुजफ्फरनगर।
कथा व्यास अरविंद जी महाराज ने धनुष यज्ञ और सीता जी की विदाई का बड़े ही मार्मिक तरीके से वर्णन किया। राजा जनक जब अपनी लाडली को विदा करते हैं तो उनकी आंखों से आंसू निकल आते हैं। प्रसंग पर श्रोता भी भाव विभोर हो गए और आंखें नम हो आई।
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श्री हरी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में महावीर चौक स्थित बैंक्वट हाल में चल रही श्रीराम कथा में राष्ट्र संत अरविंद जी महाराज ने सीता स्वयंवर, राम बारात और सीता विदाई का बड़े ही सुंदर ढंग से वर्णन किया। महाराज श्री ने कहा कि जीवन में सुखी रहने के लिए हरिसुमरण और संतों की कृपा होना जरूरी है। कथा के छठे दिन जब उन्होंने सीता जी की विदाई की कथा का वर्णन किया और बताया कि राजा जनक किस तरह अपनी बेटी की विदाई करते हैं। सीता की विदाई की कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। आंखों से आंसू बरबस ही बहने लगे। महाराज ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए बेटी की विदाई का समय बड़ा कठिन होता है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा ही केवल कथा है, बाकी सब व्यथा है। जीवन में प्राणी का भगवान से जुड़ना कथा है। भाग्यशाली की परिभाषा बताते हुए कहा कि हनुमान जी बड़भागी हैं, जटायु परम बड़भागी और अहिल्या अतिशय बड़भागी हैं। कथा के यज्ञमान अमरीश माहेश्वरी रहे। प्रसाद वितरण मूलचंद अग्रवाल ने कराया। हरबंश लाल अरोरा, नरेश शर्मा, बीपी शर्मा, सतीश शर्मा, अशोक गोयल, जनार्दन शर्मा, प्रदीप मित्तल, अनिल सिंघल, ब्रजमोहन शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा, कोमल प्रसाद गौतम आदि रहे।
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