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जीएसटी में पेन के खेल में फंसे 900 व्यापारी

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मुजफ्फरनगर। जीएसटी में पेन नंबर का खेल नहीं चल पाएगा। फर्म के नाम से जारी पेन कार्ड को ही जीएसटी में स्वीकार किया जाएगा। जिन लोगों ने अपनी फर्मों के पार्टनर के या परिवार के सदस्यों के पेन नंबर भर रखे थे, उन्हें जीएसटीआईएन जारी नहीं हुआ है। जब तक रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होगा तब तक वह जीएसटी की योजना में शामिल नहीं हो सकते। ऐसे व्यापारी शुक्रवार को दिन भर वाणिज्यकर विभाग के चक्कर काटते रहे। जिले में ऐसे लगभग 900 व्यापारी हैं।
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जिले में विभिन्न टैक्स देने वाले लगभग 13500 व्यापारी हैं। इनमें से लगभग 9500 व्यापारी जीएसटी माइग्रेट हो गए हैं। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो रहा है। ऐसे सभी व्यापारियों को जो जीएसटी में माइग्रेट हो गए हैं उन्हें जीएसटीआईएन जारी हुआ है। जिले में लगभग 900 व्यापारी ऐसे हैं जिन्हें जीएसटी का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं हुआ है। जब तक रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिलेगा तब तक उनका कारोबार जीएसटी में शुरू नहीं हो पाएगा। इस मामले के बारे में वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर केएम मिश्रा ने बताया कि जिन फर्मों के वकीलों और सीए ने गलत पेन नंबर भरा है, उनको रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं हुआ है। जीएसटी पेन बेस प्रक्रिया है।
फर्म के नाम पर जारी पेन नंबर के आधार पर जीएसटी में माइग्रेशन हो पाएगा। जो लोग होशियारी में अपने पार्टनर, परिवार के सदस्यों का पेन नंबर यूज करते आए हैं, ऐसे लोगों को ही झटका लगा है। इन सबके पेन नंबर सही कराकर दोबारा भेजे जा रहे हैं। नोडल अधिकारी डीएस गौतम ने बताया कि वाणिज्यकर आयुक्त ने ऐसे व्यापारियों के लिए जिन्हें जीएसटी नंबर और पासवर्ड जारी नहीं हुए हैं, उनके कारोबार को नहीं रोका जाएगा। हेल्प डेस्क के माध्यम से उनकी समस्या का निदान किया जाएगा, जो लोग माइग्रेट हुए हैं 90 दिन तक ऐसे किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं होगी।
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