कांवड़ यात्रा के दौरान नौ दिनों में मुजफ्फरनगर डिपो को करीब 70 लाख रुपये का घाटा हुआ। यातायात डायवर्ट के कारण डिपो के बेडे़ की 60 बसें रोजाना डिपो में खड़ी रही। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर प्रशासन ने 23 जुलाई रात्रि से नेशनल हाईवे पर बड़े वाहनों का संचालन बंद कर दिया था। यातायात डायवर्जन से रोडवेज बसों को वाया जानसठ, मीरापुर, मवाना, बिजनौर, देवबंद आदि मार्गों से संचालन हुआ।
यात्रियों को कांवड़ यात्रा में मार्ग बंद होने और गंतव्य तक जाने के लिए लंबी दूरी के साथ अधिक किराया खर्च करना पड़ा। ऐसे में कम लोगों ने ही बसों से यात्रा की। अनुबंधित बसें भी कम चलीं। रास्ते बंद होने से सभी रोडवेज कर्मी भी अपनी ड्यूटी पर नहीं आ सके। मुजफ्फरनगर डिपो के बेड़े में शामिल 185 बसों में से रोजाना करीब 125 बसों का ही संचालन हो सका। 60 बसें डिपो में ही खड़ी रही, जिससे कांवड़ यात्रा में डिपो की आय भी प्रभावित हुई।
डिपो के डीवीआर प्रभारी अनुज त्यागी ने बताया कि 23 जुलाई से लेकर एक अगस्त तक डिपो को करीब 70 लाख रुपये का घाटा हुआ। इन नौ दिनों में डिपो की बसें 3 लाख 81 हजार 39 किलोमीटर ही चल सकी। डिपो को सामान्य दिनों में प्रतिदिन 21-23 लाख रुपये की आय होती थी और एक बस रोजाना करीब 365 किलोमीटर चलती थी। इन नौ दिनों में एक बस रोजाना 257 किलोमीटर ही चली।
आज से नियमित सेवाएं सुचारु होंगी
कांवड़ यात्रा पूरी होने पर सोमवार अपराह्न तीन बजे मुजफ्फरनगर-बड़ौत मार्ग पर बस सेवा बहाल हुई। इसके बाद शाम पांच बजे मेरठ, खतौली की बस सेवाएं सुचारु हुईं। जिससे यात्रियों ने राहत की सांस ली। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार से डिपो से सभी बस सेवाएं पहले की भांति नियमित रुप से सुचारु होगी। सभी कर्मचारियों को मोबाइल फोन पर मैसेज भेज कर मंगलवार से नियमित ड्यूटी पर आने के निर्देश दे दिए हैं।