कोल्हुओं पर बनने लगा ताजा गुड़
मोरना। गन्ने की नई फसल तैयार होने लगी है। किसानों ने गन्ने की तैयार फसल को कोल्हुओं पर आपूर्ति करना प्रारंभ कर दिया है। चीनी मिल चलने में अभी समय है।
गन्ना उत्पादकों ने आर्थिक संकट से बचने के लिए कोल्हुओं पर गन्ना डालना आरंभ कर दिया है। मोरना क्षेत्र में और भी कोल्हू शुरू होने वाले हैं। मोरना क्षेत्र के गांव ककराला में कोल्हुओं पर ताजा गुड़ बनाना प्रारंभ हो गया है, जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत मिलने लगेगी। कोल्हुओं पर प्रति क्विंटल 270-280 रुपये के भाव से कोल्हू स्वामी के द्वारा खरीदा जा रहा है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुख्यत: किसान गन्ने की फसल पर निर्भर रहता है। शासन द्वारा नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में चीनी मिलों को चलाने की बात कही जा रही है, जिसमें करीब एक माह का समय है। गांव करहेड़ा, तिस्सा, अलीपुर, खोकनी, बेहड़ा सादात, ककरौली, चौरावाला, बिहारगढ़, छछरौली, भोकरहेड़ी, अथाई, इस्सोपुर, किशनुपर, मलपुरा, पटौली आदि गांवों में किसानों ने गन्ने की फसल की कटाई आरंभ करने की तैयारी कर दी है।
कोल्हुओं पर मिल रहा 270 का भाव
गांव टंढेड़ा के किसान पूर्व प्रधान पवन सिंह ने बताया कि किसान गन्ने की फसल पर आधारित है। हमें अन्य फसलों की ओर भी ध्यान देना होगा। ताकि हमें गन्ने की फसल की अच्छी कीमत मिल सके। गन्ने की लागत के हिसाब से कोल्हुओं पर 270 का भाव मिल रहा है, जो कि काफी कम है। मजबूरी में किसान अपनी फसल को औने पौने दाम में बेचने को मजबूर है। मोरना-भोपा-मुजफ्फरनगर मार्ग पर ग्राम ककराला में स्थित गुड़ कोल्हू के शुरू हो जाने से जहां कोल्हू मजदूरों को रोजगार का अवसर प्रदान होगा। वहीं, ताजे गुड़ का स्वाद भी मिल सकेगा। कोल्हू संचालक ने बताया कि फिलहाल गन्ने का भाव 270 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया हैं।
किसान हितों की अनदेखी
ककरौली के किसान प्रकाशवीर बाबूजी का कहना है कि केेंद्र सरकार के पास किसान उत्थान को लेकर योजनाओं की कमी है। किसान हितों को अनदेखी किया जा रहा है। जिसके कारण किसान आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। किसान दुखी और लाचार है। करहेड़ा निवासी किसान प्रमोद राठी ने बताया कि किसान गन्ने की फसल को खेतों से काटकर सरसों की फसल के लिए अगेती बुआई भारी पैमाने पर करते हैं, जिसके कारण कोल्हुओं पर गन्ने के दाम अचानक भारी गिरावट आती है। एक तो पहले से गन्ने का कम मूल्य मिलता है और किसान को अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। उधर, दि गंगा किसान चीनी मिल प्रबंधक प्रबुद्ध चौबे ने बताया कि हाल में गन्ने में सात प्रतिशत रिकवरी होती है। बारिश बंद होने के बाद गन्ने की फसल को पकने में करीब दो माह का समय लगता है। कच्ची फसल में वजन और माल कम मिलता है। जिससे किसान को वाजिब दाम नहीं मिल पाता है।