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कालजयी अटल: यादें और बातें

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मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक जीवन में पूरे देश का भ्रमण किया। जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी से जन-जन से जोड़ने के लिए वे कस्बे और गांव तक पहुंचे। चार दशक पहले मीरापुर में उन्होंने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रहित सर्वोपरि का संदेश दिया था।
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भारत रत्न वाजपेयी की बातें और यादें नहीं भूलती है। कस्बे में सिनेमाघर के निकट 40 साल पहले उनकी जनसभा हुई थी। अटल जी को सुनने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटी थी। अपने काव्य, व्यंग्य और हास्य से उन्होंने भाव विभोर कर दिया था। वाजपेयी को मीरापुर में आमंत्रित करने को सत्यप्रकाश शर्मा, रामशरण शर्मा, अनिल गोयल, ब्रहमानंद, महावीर प्रसाद आदि ने पहल की थी। उनकी सभा की व्यवस्था में लालचंद, बिजेश्वर शरण, मालती शर्मा, महावीर प्रसाद, राधेश्याम अग्रवाल, रामशरण पहलवान आदि की भूमिका रही थी। सभा के बाद वाजपेयी ने रामलीला भवन में भोजन ग्रहण किया था। वर्ष 1991 में दिल्ली से बिजनौर जाते समय रामराज तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया था। आजाद बंसल और धनेश बंसल बताते है कि अटल जी कार से उतरे तो बोले, यह कौन सी जगह है। कार्यकर्ताओं ने जवाब दिया, यह रामराज है। वाजपेयी ने ठहाका लगाया कि अब तो रामराज आ गया, आगे जाने की जरूरत नहीं है।

दयाकौर ने किया तिलक, अटल ने दी मिलाई
बुढ़ाना। वर्ष 1996 में कांधला विधानसभा सीट से भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष रामकुमार सहरावत को प्रत्याशी बनाया था। उनके बुढ़ाना में चुनावी कार्यालय के उद्घाटन को जब अटल बिहारी वाजपेयी के आना निश्चित हुआ तो कार्यकर्ताओं में जोश भर गया। सभा में अटल बोले, बिजली प्रदेश में आती कम है, जाती ज्यादा है।
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जनवरी 1994 में कल्याण सिंह की रैली के बाद पार्टी ने युवा चेहरे रामकुमार सहरावत को कांधला सीट से टिकट दिया। कस्बे में भाजपा के कार्यालय के उद्घाटन का मौका था। चिरपरिचित अंदाज में वाजपेयी ने कहा कि सूबे में बिजली की आंख मिचौली देख रहा हूं, आती कम है और जाती ज्यादा है। प्रत्याशी के हक में उनकी बात पर हर कोई हंस पड़ा। अटल ने कहा, सहरावत बच्चा है, लेकिन अच्छा है। गांव गढ़ी सखावतपुर में सहरावत के घर जुटे ग्रामीणों से वे सह्दयता से मिले। किसानों की दिक्कतें सुनी। सहरावत बताते है कि वाजपेयी ने बेसन की रोटी पर मक्खन लगा कर खाई और शक्कर का भी स्वाद लिया। ताई दयाकौर ने उन्हें तिलक किया तो अटल जी ने 100 रुपये भेंट किए। वेस्ट यूपी के देहाती खाने की उन्होंने तारीफ की।

जैकेट से निकाली पर्ची, प्रत्याशी हो गया तय
चरथावल। राजनीति में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के निर्णय उनके विराट व्यक्तित्व को जाहिर करते है। चरथावल सुरक्षित सीट से टिकट के दावेदारों की दिल्ली में गहमा-गहमी थी। अचानक वहां आए वाजपेयी ने अपनी जैकेट की जेब से एक पर्ची निकाली और बोले प्रत्याशी का चयन हो गया, बाकी लौट जाए। यह संस्मरण भाजपा के पूर्व विधायक रणधीर सिंह को नहीं भूलता है।
पूर्व राज्यसभा सांसद एवं मंत्री मालती शर्मा ने उनके टिकट की पैरोकारी की थी। वर्ष 1993 का वाक्या है। मालती शर्मा ने अटल जी की जैकेट में रणधीर सिंह की उम्मीदवारी की पर्ची डाल दी। वरिष्ठ सहयोगी के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए उन्होंने टिकट के दावेदारों के बीच सार्वजनिक घोषणा कर दी कि चरथावल से प्रत्याशी तय हो गया है। उनकी कृपा से टिकट पाकर अधिवक्ता रणधीर सिंह पहली बार विधायक बने। शहर के आर्यपुरी में निवास कर रहे रणधीर सिंह बताते है कि पूर्व सांसद मालती शर्मा के साथ तीन बार अटल जी से मिलने का मौका मिला। उनकी संवेदना, शिष्ट बातें और देश भक्ति नहीं भूलती। उन्हीं के आशीर्वाद से दो बार एमएलए बनने का मौका मिला। हैबतपुर निवासी भाजपा नेता विजय सैनी बताते है कि वर्ष 1984 में मास्टर रामपाल सैनी को लोकसभा का टिकट दिलाने के लिए मालती शर्मा उन्हें दिल्ली ले गई। सैनी बताते है कि वाजपेयी के व्यवहार ने उनकी महानता दर्शा दी। अटल बोले, जिसके कदम क्षेत्र में पड़ जाते है उनकी खुशबू दिल्ली पहुंच जाती है। वाजपेयी ने उनका टिकट पक्का कर दिया था।
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