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मोबाइल हैल्थ टीम के लिए चालू कराई 1

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मुजफ्फरनगर।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फिर से मोबाइल हेल्थ वैन शुरू करा दी है। चार माह से मोबाइल वैन पर घोटाले का ब्रेक लगा था। वर्ष 2016-17 के वाहन टेंडर घोटाले के कारण विभाग ने कार्यक्रम से हाथ खींच लिए थे। अब दोबारा ने सीडीओ की देखरेख में टेंडर छोड़ा गया है। इसके चलते जिले में दिल्ली की एक कंपनी को मोबाइल हेल्थ वैन चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह वैन एक नवंबर से प्रारंभ करा दी गई है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के लिए चिकित्सकों की टीम को मोबाइल हेल्थ वैन उपलब्ध कराई जाती है। चिकित्सकों की टीम गांवों के साथ प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करती है। जिसमें बच्चों की आंख, नाक, कान के साथ अन्य बीमारियों की जांच होती है। अस्वस्थ्य बच्चों का डाटा बनाकर उनका जिला चिकित्सालय पर इलाज किया जाता है। यह सभी कार्य आरबीएस के तहत होता है। स्वास्थ्य विभाग में आरबीएस का कार्य चार माह से रुका था। इसके पीछे कारण स्वास्थ्य विभाग में वाहन घोटाला था। जिसमें करीब 15 लाख रुपये का गबन किया गया। इस खेल में विभाग के भूतपूर्व सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार के साथ पटल सहायक पूरन सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. देवानंद, डॉ. पुष्पेंद्र, डॉ. सतीश, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. संजीव कुमार समेत 11 कर्मचारियों को दोषी माना गया है। घोटाले के बाद से रुके कार्यक्रम का चालू कराने के लिए लखनऊ से लगातार दबाव बनाया गया। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई कार टेंडर खोले, लेकिन ट्रांसपोर्टरों ने वाहन लगाने से इंकार कर दिया। पूरे मामले की कमान सीडीओ अंकित अग्रवाल को दी गई।
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सीडीओ की देखरेख में नए सिर से मोबाइल हेल्थ टीम के लिए ई-टेंडरिंग की गई। जिसमें दिल्ली की एक कंपनी ने अपने 18 वाहन आरबीएस कार्यक्रम के लिए दिए हैं। सत्र 2017-18 के लिए इन वाहनों को अधिकृत किया गया है। एक नवंबर से सीडीओ ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर नौ ब्लॉक में मोबाइल हेल्थ वैन को रवाना किया है।
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सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के लिए नए सिरे से वाहन अधिग्रहण किए गए हैं। जिसके बाद कार्यक्रम को चालू कराया गया है। पूर्व में विभाग में घोटाला होने के कारण आरबीएस कार्यक्रम रुका था।
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