जिले में छह विधानसभाओं में 95 प्रत्याशियों ने ताल ठोक कर प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है। शहर की सदर और बुढ़ाना सीट को लेकर प्रशासन टेंशन में है, यहां 56 प्रत्याशी चुनावी जंग के लिए तैयार हैं। ऐसे में वोटिंग कराने के लिए दोनों सीटों पर अतिरिक्त ईवीएम लगानी पड़ेंगी। अब प्रशासन की निगाह और तैयारी 27 जनवरी पर टिकी है। नाम वापसी होने के बाद तस्वीर साफ होगी। उसके आधार पर ही अगला कदम उठाया जाएगा।
24 जनवरी को नामांकन का आखिरी दिन था। सभी छह विधानसभाओं में 95 प्रत्याशी मैदान में खड़े हैं। सबसे अधिक शहर सीट पर 22, दंगा प्रभावित विधानसभा बुढ़ाना में 18 और खतौली में 16 प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं। इन तीनों विधानसभाओं में प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि तीनों विधानसभाओं में अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) लगानी पड़ेंगी।
इसकी वजह ईवीएम में 16 बटन हैं। जिनमें 15 बटन पर प्रत्याशी के चिह्न दर्ज होते हैं, जबकि 16वां बटन नोटा (नन ऑफ अबव) का रहता है। इन विधानसभा में प्रत्याशियों की संख्या यही रही तो प्रत्येक बूथ पर डबल ईवीएम जोड़नी होगी। ऐसे में प्रशासन को करीब 963 अतिरिक्त ईवीएम लगानी पड़ेंगी। अब प्रशासन को 27 जनवरी का इंतजार है। इस दिन नाम वापसी रहेगी। मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना और खतौली विधानसभा सीट में प्रशासन एकाध प्रत्याशी के नाम वापसी की आस लगा रहा है। इसी पर तैयारियां टिकी हैं। संख्या यही रही तो प्रशासन को बूथों पर मशीनों का इंतजाम करना होगा।
795 बीयू और 225 सीयू रिवर्ज
प्रशासन के पास फिलहाल 1819 बूथों पर ईवीएम का पूरा इंतजाम है। बैलेट यूनिट 2923 और 2353 कंट्रोल यूनिट हैं। बैलेट यूनिट 795 रिजर्व रखी हैं। जिनमें 13 खराब हैं। जबकि कंट्रोल यूनिट रिजर्व में 225 हैं। इनमें 83 खराब है। टेंशन यह है कि पर्याप्त रूप से जनपद में ईवीएम का कोटा पूरा नहीं है। ऐसे में प्रशासन दूसरे जनपद से ईवीएम की पूर्ति कर सकता है।