भागवत सात्विक और पवित्र विचारों का सृजन करती है
मोरना। स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि भागवत मन, मस्तिष्क, शरीर और आत्मा के गुप्त शक्ति भंडार का ताला खोल देती है। शुकतीर्थ भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में शिमला हिमाचल प्रदेश से पधारे भागवत समाजसेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद जी महाराज ने किया।
शुकतीर्थ में आयोजित भागवत कथा में स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि भागवत सात्विक और पवित्र विचारों का सृजन करती है। जब मनुष्य अपने विचारों को वश में कर लेता है, तब उसका मन भी वश में हो जाता है। मन एक समुद्र की तरह है, जो हमेशा अशांत रहता है। इस अशांत तथा भांति संसार में मानव का मन भी शांत नहीं रहता। मानव अपनी असंख्य आंतरिक परेशानियों तथा सांसरिक आसक्तियों से पीड़ित होकर पल पल मर रहा है। भागवत कथा के श्रवण से मन को शांति मिलती है, मन शांत और वश में हो जाने से जीवन शुद्ध और सात्विक हो जाता है। व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माता बन जाता है। भागवत आत्मानुशासन, अंतरात्मा की एकात्मता की गहन भावना और शांति का अनुभव कराती है। कथा वाचक पंडित अनिल डोहरु 90 वर्षीय शुंकाराम, कांशीराम शर्मा, रमेश पठानिया आदि उपस्थित रहे। दूसरी ओर, वेदव्यास भवन में विलासपुर छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं द्वारा आयोजित कथा में स्वामी ने कहा कि मन की शांति जीवन की असली संपत्ति है।