स्वामी रविंद्र आश्रम महाराज ब्रह्मलीन
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ दंडी आश्रम में स्वामी रविंद्र आश्रम महाराज शनिवार की देर रात ब्रह्मलीन हो गए, जिससे साधु संतों में शोक व्याप्त हो गया। मंत्रोच्चारण के बीच संत को गंगा की अविरल धारा में जल समाधि दी गई।
दंडी आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी गुरुदत्त महाराज ने बताया कि डा. रविंद्र आश्रम जी महाराज की भेंट प्रयागराज के कुंभ में आश्रम संस्थापक स्वामी विष्णुदत्त महाराज से हुई थी। इसके बाद से वर्ष 1989 में स्वामी रविंद्र आश्रम जी महाराज ने शिष्य का चोला ओढ़कर सांसारिक रिश्तों से किनारा कर भगवान की भक्ति में लीन हो गए थे। स्वामी जी लखनऊ से बीएमएस कर प्रैक्टिस में लगे हुए थे। मेेरे गुरु भाई थे। इनका जन्म मेरठ के मवाना तहसील के गांव किला पुट्ठी में वैद्य पंडित बनारसीदास शर्मा के यहां हुआ था। वैद्यजी को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त था। माता ब्रह्मा देवी के बेटे में सोमदत्त, हरदत्त, देवदत्त, रामदत्त, धमेंद्र शर्मा व रविंद्र आश्रम महाराज को जन्म दिया था। परिवार में इकलौती बहन सुशीला से बेहद लगाव रखते थे। परिवार की रजामंदी से बालादेवी से शादी की गई, जिनसे डा. महेश, दिनेश, ब्रिजेश और बेटी माधवी शर्मा पैदा हुईं। आश्रम के प्रांगण में महामंडलेश्वर स्वामी निर्मलानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज, महादेव आश्रम महाराज, श्रीकृष्ण स्वरुप महाराज, स्वामी पंकज स्वरूप, अवस्थी, मनोहर शर्मा, राजीव वेदपाठी, उमाकांत, रामफल, गोपाल शर्मा आदि के साथ अनुयायियों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद गंगा खादर के जिला बिजनौर के क्षेत्र चाहड़वाला गांव के सामने गंगा की निर्मलधारा में ब्रह्मलीन स्वामी रविंद्र आश्रम महाराज के पार्थिव शरीर को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच जल समाधि दी गई।