मोरना। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. श्याम सुंदर पराशर की भागवत कथा का विधि विधान से शुभारंभ स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। स्वामी ने कहा कि भागवत जीवन के उद्देश्य का बोध कराती है।
डोंगरे भागवत भवन में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि जीवन परमात्मा की अमूल्य धरोहर है, जिसका सदुपयोग करें। जीवन का उद्देश्य आत्म कल्याण से बढ़कर दूसरों का कल्याण होना चाहिए। मानव शरीर परोपकार के लिए बना है। तन, मन और धन से समस्त प्राणियों के कल्याण को जो सतत प्रयत्नशील है, वही परोपकार की अवधारणा का स्वरुप है। परमार्थ सेवा ईश्वरीय शक्ति का अनुभव कराती है। परमार्थ से मन, वाणी तथा कर्म में एकता स्थापित होती है। मनुष्य सहज ही प्रभु कृपा का पात्र बन जाता है। स्वार्थ रहित सेवा जीवन का मूल भूत लक्ष्य होना चाहिए। असहाय, अनाथ, दीन दुखी तथा दिव्यांग की सेवा में जीवन का परम उत्कर्ष है। कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पराशन ने कहा कि संत का जीवन निर्मल एवं स्वच्छ होना चाहिए। पवित्र मन ही भगवान को स्वीकार्य है। शुभ संकल्प परिवार के यज्ञमान नरेश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, परमेंद्र सिंह रावत, अजय शर्मा, पुनीत कटारिया ने भाग लिया। कथा श्रवण के लिए कई प्रांतों के श्रद्धालु शुकतीर्थ पहुंचे है।