बीच की श्रेणी के लोग दुख ही भोगते हैं : साध्वी
मोरना।
नवग्रह शनिधाम शुक्रताल में 21 दिवसीय हनुमत महायज्ञ समारोह का रविवार को समापन हो गया। पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के रमता पंच तथा महापुरुषों, मठाधीशों एवं संत महापुरुषों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर विद्या गिरि साध्वी ने कहा कि जब कोई विवेकी अपने शरीर, इंद्रियों, मन, बुद्धि को पृथक कर ब्रह्मस्वरूप समझता लेता है, तब वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इस संसार में दो प्रकार के लोग ही सुखी हैं। प्रथम जो मूढ़ है, द्वितीय जिन्होंने बुद्धि से अतीत अपने स्वरूप को प्राप्त कर लिया है। बीच की श्रेणी के लोग तो दुख ही भोगते हैं। हनुमत महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ब्राह्मणों व पुरोहितों ने 25 मूलपाठों का विधिविधान पूर्वक पाठ कराते हुए पूर्ण आहुति संपन्न कराई। इसी दौरान 9 दिनों तक रामायण का निरंतर अखंड पाठ का आयोजन भी हुआ। कार्यक्रम के समापन पर श्रीकृष्ण निवास आश्रम कनखल हरिद्वार से पधारे परम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी गिरीधर गिरि ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाकर धर्म लाभ कमाया। समारोह के समापन पर महामंडलेश्वर जालंधर के महामंडलेश्वर देवेंद्रनंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर श्याम चेतन पुरी महाराज, महामंडलेश्वर गोपालाचार्य महाराज, स्वामी विवेकानंद गिरि महाराज, स्वामी मुकुता गिरि महाराज, पुरुषोत्तम गिरि महाराज, स्वामी कृपालदास महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ महाराज आदि ने प्रवचन देेकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। इस मौके पर आयोजित विशाल भंडारे का प्रसाद साधु संतों को खिलाकर नकद दान दक्षिणा भी दी गई। लमारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड आदि से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।