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मोरना मिल में किसानों का हंगामा व प्रदर्शन

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किसानों ने मिल अधिकारियों को धरने पर बैठाया
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मोरना। द गंगा किसान चीनी मिल मोरना में जिला बिजनौर के गंगा खादर के हजारों बीघा गन्ना रकबे के लिए अवैध रूप से गन्ना सट्टे के द्वारा जारी पर्ची वितरण को बंद कराने की मांग को लेकर किसानों ने मिल अधिकारियों की टीम को घंटों बंधक बनाकर धरने पर अपने बीच बैठाया। लिया। मिल प्रबंधन ने किसानों के आरोप के चलते गांव बिहारगढ़, शुक्रताल, मजलिसपुर तौफीर, रसुलपुर, नूरदयालपुर, भंडूरा, सिताबपुरी, जोली, बेहड़ा सादात के किसानों का गन्ना सप्लाई बंद करने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर किसान शांत हुए।
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मोरना मिल में दूसरे दिन भी गांव अथाई, इस्सोपुर, ककराला, करहेड़ा, किशनपुर, कस्बा भोकरहेड़ी, ककरौली, तिस्सा, भोपा, बेलड़ा, माजरा, निरगाजनी, रहमतपुर आदि गांवों के किसानों ने हंगामा करते हुए कंप्यूटर कक्ष व मिल प्रबंधक कार्यालय का घेराव कर धरना देकर बैठ गए। सूचना मिलने पर किसानों के बीच आए मुख्य गन्नाधिकारी राजकुमार सिरोही, मुख्य लेखाकार व सीओ अवधेश सिंह को धरने पर अपने बीच में बैठा लिया। भोकरहेड़ी के किसान रामपाल सिंह ने कहा कि शुक्रताल गंगा से लेकर बैराज गंगा सेतु तक गंगा के दोनों ओर करीब 70 प्रतिशत जमीन का भाग जिला बिजनौर के रकबे में दर्ज है, जिसमें किसानों ने गन्ने की फसल बो रखी है। जिला बिजनौर के किसानों का गन्ना वहां के मिल को देना चाहिए। बिजनौर के किसान मोरना मिल पर मिल कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध रूप से गन्ना सप्लाई कर रहे हैं, जिसके चलते मोरना क्षेत्र के किसानों के बीच समय से गन्ना पर्चियों को वितरण नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना था कि पहले मिल प्रशासन मोरना को क्षेत्र के किसानों का गन्ना लेना होगा। इसी बीच किसान धीर सिंह डायरेक्टर, गुलबीर सिंह, देवव्रत, प्रधान राजेंद्र, संसार सिंह, जगत सिंह, बाबूराम राठी, रणबीर सिंह, जसविंद्र सिंह, जावेद अब्बास, उदयवीर, प्रवीर सभासद फोंदी आदि ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो अनशन करने के लिए मजबूर होंगे। मिल अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया। इसके बद ही किसानों ने धरना समाप्त किया।
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