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गुटबाजी ने किया सपा का बंटाधार

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गुटबाजी ने किया सपा का बंटाधार
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मुजफ्फरनगर।
शहर पालिका चुनाव में सपा की हार ने संगठन को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्यों मुस्लिम वोटरों ने पार्टी प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल को वोट नहीं दिया। गुटबाजी में फंसी सपा को तीसरे स्थान पर खिसकना पड़ा। पार्टी जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप की ताजपोशी भी कोई चमत्कार नहीं दिखा पाई।
सपा ने पालिका चुनाव में पूर्व विधायक मिथलेश पाल को प्रत्याशी बनाकर अतिपिछड़ा कार्ड खेला था। मुस्लिम और अतिपिछड़ों के बूते पार्टी ने भाजपा, कांग्रेस, बसपा को चुनौती दे रखी थी। चुनाव में मिली हार के बाद संगठन को सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। चुनाव से ऐन पहले ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने गौरव स्वरूप को जिले की कमान सौंपी थी। शहरी सीट पर दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके गौरव स्वरूप पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मुसलिमों और वैश्यों का थोक में वोट नहीं दिला पाए। इन्हीं दोनों बिरादरियों में पूर्व मंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप की गहरी पकड़ थी। संगठन ने पालिका चुनाव के लिए योजनाबद्ध तरीके से रालोद छोड़कर आईं मिथलेश पाल को सपा ज्वाइन कराई थी। चुनाव में अतिपिछड़ों में प्रत्याशी ने अपने दम पर पकड़ बनाई, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं में उनका जादू नहीं चल पाया। चुनाव प्रचार का पूरा वक्त अतिपिछड़े इलाकों में गुजार दिया गया। मतदान से ठीक पहले मुस्लिम बहुल क्षेत्र में जनसभाएं शुरू की गईं। सपा का यह प्रयास कारगर साबित नहीं हो पाया। पार्टी के मुस्लिम नेता होने का दंभ भरने वाले भी कुछ नहीं कर पाए। सपा का परंपरागत वोटबैंक कांग्रेस की ओर खिसक गया। गुटबाजी से घिरी सपा में किसी नेता ने चुनाव का नेतृत्व नहीं संभाला। जिसकी वजह से प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर सिमटना पड़ा। कांग्रेस को जहां 62590 वोट मिले, वहीं सपा को 14514 मत ही मिल पाए।
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पत्नी को नहीं जिता पाए बच्ची सैनी
मुजफ्फरनगर। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामलाल बच्ची सैनी की पत्नी सुषमा सैनी भी शाहपुर नगर पंचायत में बुरी तरह हार गईं। इस सीट पर भाजपा के परमेश सैनी को 4397 और निर्दलीय इलियास को 3016 वोट मिले, जबकि सुषमा 2124 वोट लेकर तीसरे स्थान पर पहुंच गर्ईं। सपा ने चुनाव से पहले ही उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाया था। हालांकि जिले की बात करें तो सपा को खतौली और भोकरहेड़ी में जीत मिली है।
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