वक्फ करबला कमेटी शिया समाज की ओर से मोहर्रम के जुलूस और मजलिसों का कार्यक्रम जारी किया गया है। मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही इमामबाड़ों और बारगहों में मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। अबूपुरा की मजलिस में मौलाना ने खिताब फरमाया कि दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत के लिए करबला में हुसैनी फौज कुर्बान हो गई। करबला के शहीदों की याद में सोगवार जार-जार रोए।
मोहर्रम का चांद दिखने के साथ शिया समाज में सोग शुरू हो गया। इमामबाड़ों और बारगाह में मजलिसों का दौर प्रारंभ हो गया है। देर शाम को अबूपुरा के इमामबाड़े में मौलाना मोहम्मद आलम ने खिताब फरमाया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन ने यजीद के सामने झुकना मंजूर नहीं किया। उन्होंने दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत और इंसानियत के लिए कुर्बानी दी। मोहर्रम के पहले दिन जगह-जगह इमामबारगाहों में मजलिसें की गई। घरों में महिलाओं ने भी मजलिसों का दौर शुरु कर दिया। उधर, चांद दिखने के बाद वक्फ करबला कमेटी शिया समाज ने मोहर्रम के जुलूस और मजलिस का कार्यक्रम जारी किया है।
26 को निकलेगा जुलूस
मुजफ्फरनगर। मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष डॉ हसन मेंहदी ने बताया कि मोहर्रम की पांच तारीख यानी 26 सितंबर को पहला जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस बकरा मार्केट से मोती महल, सराफा बाजार से कटहैरा सैय्यादान, कस्सवान बाजार, खालापार टंकी चौक से अबूपुरा के पंचदरा, टंकी चौक से आरफियान इमाम बारगाह पहुंचकर सम्पन्न होगा। मुख्य जुलूस 01 अक्तूबर (मोहर्रम की 10 तारीख) को काली नदी स्थित करबला से तबलशाह रोड कादिर राणा की कोठी, खादरवाला, खालापार टंकी से अबुपुरा, ठाकुरद्वारा से लोहिया बाजार, घास मंडी तांगा रोड हनुमान चौक से शामली रोड, गऊशाला रोड होते हुए वापस काली नदी स्थित करबला में संपन्न होगा। इसके बाद करबला में ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे।