मुजफ्फरनगर। शौचालय निर्माण के लिए जारी 17 करोड़ लाभार्थियों पर ही फंस जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम ने जिले के 200 आला अफसरों को शौचालय निर्माण कराने में लगा दिया है। सभी को आवंटित गांवों में लाभार्थियों की बैठक कर उन्हें शौचालय बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वच्छता मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण के लिए जिला पंचायती राज विभाग एक साथ 34839 लाभार्थियों को पहली किश्त के रूप में छह हजार प्रत्येक को जारी कर चुका है। जिले में मात्र 6010 शौचालय ही बने हैं। तीन माह में बाकी शौचालय नहीं बनने से पूरा जिला प्रशासन सकते में है। लगभग 17 करोड़ लाभार्थियों पर फंस गया है। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के 200 आला अफसरों को शौचालय निर्माण के काम में लगा दिया है। इन अधिकारियों में जिले में सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला स्तरीय सभी विभागीय अधिकारी शामिल हैं। सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा को डीपीआरओ ऑफिस में बैठकर कार्रवाई देखने के लिए कहा गया है।
सीडीओ अंकित अग्रवाल सभी अधिकारियों के कार्यों की मॉनिटरिंग करेंगे। 100 ऐसे गांव चिह्नित किए गए हैं, जिनमें 20 हजार के लगभग शौचालय बनने हैं। गांव में लगाए गए दोनों अधिकारी लाभार्थियों और ग्रामीणों की बैठक लेंगे। लाभार्थियों को समझाएंगे कि जो सरकारी पैसा उन्हें मिला है, उसका शौचालय ही बनाना है। सरकार का यह उद्देश्य है कि हर घर में शौचालय होना चाहिए, जो शौचालय नहीं बनाएंगे उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई भी करनी पड़ सकती है।
ईओ ने खुद खड़े होकर गड्ढे खुदवाए
शहरी क्षेत्र में खातों में पैसा जारी होने के बाद भी जो लोग शौचालय नहीं बनवा रहे ईओ ने ऐसे परिवारों में जाकर स्वयं खड़े होकर शौचालय के गड्ढे खुदवाए। ईओ ने बताया कि जांच में कुछ लोग ऐसे भी सामने आए हैं, जिनका टारगेट शौचालय के पैसे हजम करना है। पालिका की पूरी टीम शौचालय निर्माण को गंभीरता से ले रही है। शहर में सर्वे के बाद 3026 शौचालय का लक्ष्य है। 400 टॉयलेट बन चुके हैं। 450 निर्माणाधीन हैं। जिन लाभार्थियों के यहां पैसा जारी हो गया है, उन पर शौचालय बनवाने का दबाव वह खुद जाकर बना रहे हैं। इसी कड़ी में मोहल्ला रविदास में कुछ घरों में शौचालय के लिए गड्ढे तैयार कराए गए।