मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि जब हमारे शरीर में कोई बीमारी हो जाती है, तो तुरंत उपचार कराते हैं। हम आत्मा के महारोग को दूर करने के लिए इलाज नहीं कराते। आत्मा के रोगों को उपचार केवल आध्यात्मिक चिकित्सालय में ही हो सकता है।
वहलना के जैन मंदि में धर्म सभा में प्रवचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु पार्श्वनाथ ने आध्यात्मिक चिकित्सा की थी, तभी वह पूर्ण स्वस्थ दशा को प्राप्त हुए थे। जन्म, जरा, मृत्यु रूपी रोगों को दूर करने के लिए आपको आध्यात्मिक चिकित्सालय में जाना होगा। आध्यात्मिक चिकित्सालय में सिविल सर्जन के रुप में आचार्य आदि परमेष्ठी हैं, जो हमारे अंदर की गंदगी को दूर करते हैं। महिलाओं के उपचार के लिए भी आर्यिका, क्षुल्लिका आदि नर्स के रूप में कार्य करती हैं। जिनवाणी, गुरुवाणी औषधि का काम करती है। महाराज श्री ने कहा कि जीवन में जितना संयम, नियम का पालन करोगे, उतने ही अधिक स्वस्थ रहोगे। मन और इंद्रियों को वश में रखना इंद्रिय संयम है। नियमों का पालन करने से मन मजबूत होता है। आध्यात्मिक चिकित्सा तभी सफल होगी जब हम कषाय, पाप, प्रमाद आदि से परहेज रखेंगे। महामंत्री राजकुमार जैन और नरेंद्र जैन ने कार्यक्रम में सहयोग कर रहे लोगों का आभार जताया।
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