कार के शौकीनों को करनी पड़ेगी जेब ढीली
मुजफ्फरनगर। नेशनल ग्रीन ट्रब्यिूनल (एनजीटी) ने कार शौकीनों पर कार्रवाई का चाबुक चलाया है। एनसीआर में 2000 सीसी इंजन का पंजीकरण तो होगा, लेकिन उससे पहले ग्रीन टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह ग्रीन टैक्स कार की कुल वैल्यू के एक फीसदी की दर देना पड़ेगा। वहीं, नए पंजीकरण पर एआरटीओ ने ऑनलाइन टैक्स से हाथ खड़े कर दिए हैं।
पहले एनजीटी ने डीजल के 10 और पेट्रोल के 15 साल पुराने वाहनों के एनसीआर में संचालन पर रोक लगा दी थी। इन्हें एनसीआर क्षेत्र से बाहर एनओसी देकर चलाने के लिए कहा था। अब एनजीटी ने 2000 सीसी क्षमता के इंजन वाली कारों के संचालन और पंजीकरण पर ब्रेक लगा दिया। अब एनजीटी ने मामले में संसोधन किया गया है। इन वाहनों का संचालन तो हो सकेगा, लेकिन पहले टैक्स की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। 2000 सीसी इंजन के शौकीन वाहन स्वामियों को पंजीकरण में जेब ढीली करनी पड़ेगी। ऐसे वाहनों पर ग्रीन टैक्स जोड़ा गया है। यह टैक्स कार की कुल कीमत पर एक फीसदी की दर से लगेगा। जो कार खरीदते वक्त की काटा जाएगा।
इसके बाद इन कारों का राज्य के हिसाब से टैक्स देना पड़ेगा। वहीं, नई कारों के पंजीकरण में टैक्स की रकम कैश देनी होगी। ट्रांसपोर्ट विभाग ऑनलाइन टैक्स उन वाहनों का लेगा, जो पहले से ही कहीं रजिस्टर्ड होंगे। नए नियमों के चलते एआरटीओ में आधा दर्जन से अधिक वाहनों के पंजीकरण रुके हुए हैं। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि एनजीटी ने 2000 सीसी के वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाई थी, लेकिन वाहन की कुल कीमत पर एक फीसदी टैक्स देकर पंजीकरण होगा। हालांकि यह नियम केवल निजी रूप में इस्तेमाल होने वाली कारों पर लागू किया गया है।