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सफल नहीं हो रही आरसी घर भेजने की योजना

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सफल नहीं हो रही आरसी घर भेजने की योजना
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मुजफ्फरनगर। उप संभागीय परिवहन विभाग की डाक से आरसी और डीएल घर भेजने की योजना सफल नहीं हो पा रही है। आवेदकों द्वारा अपने मूल निवास के स्थान पर केयरऑफ एड्रेस डालने के कारण डाक वापस एआरटीओ कार्यालय पर लौट रही है। इस योजना को सफल बनाने के लिए अब एआरटीओ विभाग ने आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन के साथ ही फार्म पर आवेदक के पड़ोसी का पता और मोबाइल नंबर अंकित करना अनिवार्य कर दिया है।
एआरटीओ कार्यालय पर रोजाना करीब 75 बाइकों और आठ कारों का पंजीयन होता है। इसके अलावा रोजाना लगभग 80 आवेदन ड्राइविंग लाइसेंस के दर्ज होते हैं। पंजीयन के बाद आवेदक अपने वाहन की आरसी और अपना डीएल लेने के लिए कार्यालय पर चक्कर काटते रहते हैं, जिससे जहां एआरटीओ कार्यालय पर काफी भीड़ होती है, वहीं कर्मचारियों का कार्य भी प्रभावित होता है। इससे निपटने के लिए विभाग ने वाहनों की आरसी और डीएल बनाकर उन्हें आवेदकों के घर पर डाक से भेजने की व्यवस्था की है, ताकि आवेदकों को घर पर ही आरसी व डीएल मिल सके और उन्हें कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। मगर, यह योजना अभी तक पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो पाई है। आवेदकों के पते नई कालोनी, बस्ती में या केयरऑफ एड्रेस के होते हैं, उन्हें डाक से आरसी व डीएल नहीं मिल पाते, क्योंकि डाक कर्मी उनके सही पते तलाश नहीं पाते। इसलिए ये डाक वापस उप संभागीय परिवहन विभाग को भेज दी जाती है।
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पड़ोसी और दोस्त का मोबाइल नंबर देना होगा
एआरटीओ राजीव कुमार बंसल का कहना है कि डाक से आरसी और डीएल भेजे जा रहे हैं, मगर नई बस्तियों या केयरऑफ के पतों पर डाक कर्मी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए ये डाक वापस विभाग के पास आ रही है। इसके समाधान के लिए अब फार्म पर ही आवेदक को अपने मोबाइल नंबर के अलावा पड़ोसी या दोस्त का मोबाइल नंबर भी अंकित करना होगा। रजिस्टर्ड डाक पर भी विभाग इन मोबाइल नंबरों को दर्ज करेगा, ताकि मकान न मिलने की स्थिति में डाक कर्मी मोबाइल फोन कर आवेदक को डाक रिसीव करा सके।
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