मुजफ्फरनगर। टीबी का रोग लोगों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगियों के परिवार और उनके आसपास रहने वाले 5038 लोगों को भी क्षय रोग निवारक चिकित्सा (टीपीटी) के तहत दवा खिलवा रहा है। वर्ष के शुरुंआती तीन माह में ही नए टीबी रोगियों की खोज कर 2571 का उपचार शुरू कराया गया है।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में सघन टीबी अभियान चलाया जा रहा है। जिसका उद्देश्य टीबी के छुपे रोगियों को खोजना। रोगियों की मृत्यु दर कम करना और टीबी से नए व्यक्तियों को संक्रमण से बचाना है। स्वास्थ्य विभाग को इस वर्ष 9881 टीबी रोगियों को खोजने का लक्ष्य मिला है। पहली तिमाही में लक्ष्य (2470) के सापेक्ष 106 प्रतिशत रोगियों की खोज कर ली गई है।
संक्रमण पर अंकुश लगाने को शुरू की गई टीपीटी
स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगियों के उपचार के साथ ही लोगों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाने के लिए भी गंभीर है। इसी को लक्ष्य करते हुए उपचार पा रहे टीबी रोगियों के कुछ परिवार और उनके साथ रहने वालों को भी लक्ष्णों के आधार पर चिन्हित किया गया है। जिन्हें संक्रमण से बचाने के लिए टीपीटी (ट्यूबरक्लोसिस प्रीवेंटिव थेरेपी) यानी क्षय रोग निवारक चिकित्सा दी जा रही है। छह माह तक चलने वाले इस कोर्स के तहत सप्ताह में तीन दिन दवा दी जाती है।
मल्टी ड्रग रेजिस्ट 65 रोगियों का चल रहा उपचार
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मल्टी ड्रग रेजिस्ट 65 रोगियों को भी उपचार दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एमडीआर अथवा मल्टी ड्रग रेजिस्ट व रोगी हैं। जिन्होंने दवा लेने में लापरवाही बरती। इस कारण उन पर टीबी की सामान्य दवा निष्प्रभावी साबित होने लगी। ऐसे रोगियों को चिह्नित कर विशेष उपचार दिया जा रहा है।
टीबी को जड़ से खत्म करना उद्देश्य : डॉ. लोकेश चंद्र
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि उनका उद्देश्य टीबी को जड़ से समाप्त करना है। बताया कि प्रथम सत्र में मिले रोगियों में से 2571 का उपचार शुरू करा दिया गया है। जनपद में निक्षय मित्रों की संख्या भी 1065 पर पहुंच गई है।