एनजीटी ने शुगर मिलों, फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी कर लाखों किसानों के साथ ही 50 हजार से अधिक कामगारों को झटका दिया है। 14 नवंबर तक चीनी मिलों, इंडस्ट्रियों में उत्पादन बंद रहेगा। हालांकि इसकी अवधि बढ़ भी सकती है। इसको लेकर शुगर मिलों के साथ औद्योगिक घरानों में भी बेचैनी बढ़ गई है। शुगर मिलों में रोजाना बड़े पैमाने पर चीनी का उत्पादन होता है, जो पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगा। ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ना भी लाजिमी है। एनजीटी की कार्रवाई से किसानों में आक्रोश है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। प्रदूषण की मात्रा बढऩे से लोगों में हाहाकार है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे एनजीटी ने किसानों के पराली जलाने, औद्योगिक इकाईयों के वायु प्रदूषण, पुराने वाहनों का धुआं आदि कारण माने हैं, जबकि एनजीटी में वायु प्रदूषण को लेकर केस चल रहा है। जिसकी सुनवाई 14 नवंबर को होनी है। इसको लेकर एनजीटी ने फिलहाल 14 नवंबर तक एनसीआर में आने वाली सभी औद्योगिक इकाईयों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।
एनजीटी के एक फरमान से जिले में करीब 50 हजार कामगारों को झटका दिया है। आठ शुगर मिलों में करीब 25 से 30 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि अन्य 115 फैक्ट्रियों में भी कमोबेश 20 से 25 हजार कर्मचारी रोजाना कार्य करते हैं। संचालन बंद होने से कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी प्रभाव पड़ना तय है। एनजीटी हो या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अब तक औद्योगिक इकाईयों में ही संचालन रोकती थी। पहली बार जिले में शुगर मिलें भी आदेश के लपेटे में आई हैं। शुगर मिलों में प्रतिदिन बड़े पैमाने पर पेराई होती है।
खतौली शुगर मिल एक दिन में सवा लाख कुंतल गन्ने की पेराई करती है। मंसूरपुर मिल में 75 हजार क्विंटल, मोरना में 25 हजार क्विंटल, पुरकाजी की खाईखेड़ी मिल में 40 हजार क्विंटल, रोहाना शुगर मिल 14 हजार क्विंटल, बुढ़ाना शुगर मिल में 90 हजार क्विंटल, तितावी शुगर मिल में एक लाख क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई प्रतिदिन होती है। चीनी मिलें बंद होने से लाखों किसान प्रभावित होंगे। मिलों ने एक हफ्ते का इंडेंट जारी कर रखा है। जिस पर किसान खेतों में गन्ने की कटाई किए रखते हैं। अचानक आए फरमान से किसानों के साथ शुगर मिलों की स्थिति भी बेकाबू हो गई है।
14 नवंबर तक बड़े स्तर पर शुगर मिलों और अन्य फैक्ट्रियों के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। आईआईए के अध्यक्ष कुशपुरी ने बताया कि वर्तमान में शुगर मिलों, इंडस्ट्रीज में कार्य का बेहतर समय रहता है। बाजार में भी उत्पादकों की ब्रिकी का पहिया तेज घूमता है। ऐसे में अचानक सप्लाई बंद होने से बाजार समेत औद्योगिक इकाईयों की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। बंद होने वाली औद्योगिक ईकाईयों से जुड़े करीब 50 हजार से अधिक कर्मचारी प्रभावित हो गए हैं।
कूड़ा जलाने पर अधिक खतरा
मुजफ्फरनगर। बढ़ते प्रदूषण के पीछे तर्क है कि किसानों द्वारा पराली जलाने, पुराने वाहन का धुआं आदि मुख्य हैं। सबसे बड़ी समस्या शहर और गांवों के बीच कूड़ा जलाए जाने से हैं। कूड़े में अनेक प्रकार मैटेरियल शामिल होता है। जिसमें पॉलीथिन, प्लास्टिक आदि हैं। इनके जलने से अधिक समस्या बढ़ती है। कूड़े के धुएं से कई हानिकारक गैस निकलती हैं, जो सीधे पर्यावरण में मिलकर वातावरण को दूषित करती हैं।