सपा सरकार में समाजवादी पेंशन की किस तरह बंदरबांट हुई, इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि 25 प्रतिशत का कोटा होने के बाद पेंशन पाने वाले 45 प्रतिशत मुस्लिम हैं। दलितों का 30 प्रतिशत का कोटा पूरा भी नहीं किया गया। पिछड़े तो नाम मात्र के ही रह गए। योगी सरकार ने समाजवादी पेंशन पर रोक लगा दी थी। पात्रता को लेकर जांच-पड़ताल की जा रही है।
प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार आते ही समाजवादी पेंशन को अग्रिम आदेशों तक रोक दिया गया। जिले में 56216 लोगों के समाजवादी पेंशन दी जा रही थी। प्रदेश सरकार ने समाजवादी पेंशन में 25 प्रतिशत कोटा मुस्लिमों और 30 प्रतिशत दलितों का तय किया था। 45 प्रतिशत सामान्य और अतिपिछड़ी जातियों के लोगों को रखा गया था।
समाजवादी पेंशन जिले में जो मिल रही थी, उसमें लगभग 45 प्रतिशत मुस्लिम हैं। कुल पेंशन में से 24, 675 मुस्लिम लाभार्थी हैं। इनमें 19355 ग्रामीण और 5324 शहरी क्षेत्र के निवासी हैं। पेंशन पाने वाले दलितों की संख्या 14,700 है। सामान्य और अतिपिछड़ी जातियों के लाभार्थी 16834 हैं। लाभार्थियों में अपात्रों के आने की शिकायत के चलते प्रदेश सरकार ने पेंशन को फिलहाल रोककर जांच शुरू कराई है। अब यह तो जांच में ही सामने आएगा कि अपात्र कितने हैं।
पात्रों के नाम हैं पते नहीं
मुजफ्फरनगर। शहरी क्षेत्र में समाजवादी पेंशन की जांच कर रहे नगर पालिका कर्मचारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। समाज कल्याण विभाग ने पेंशन पाने वालों की सूची तो भेज दी है, उनके पते नहीं भेजे हैं। पालिका ईओ अजीत सिंह कहते हैं कि बिना पते के पेंशन की जांच कैसे हो सकती है।
हमने तो आदेशों का पालन किया
मुजफ्फरनगर। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीबी पांडेय का कहना है कि विभाग ने उन्हीं लोगों को पेंशन जारी कि ग्राम प्रधान और निकाय अध्यक्षों ने जिनके प्रस्ताव करके भेजे। जिले में अधिक आबादी के कारण मुस्लिमों की संख्या कोटे से अधिक हुई और दलितों की कम आबादी होने के कारण घट गई।
गरीब मुस्लिमों के लिए बड़ा सहारा
मुजफ्फरनगर। सपा नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष सतेंद्र सैनी का कहना है कि समाजवादी पेंशन उन लोगों को दी जा रही थी, गरीब होने के बाद भी जिन्हें कोई पेंशन नहीं मिल पा रही थी। जिले में गरीब मुस्लिमों की संख्या ही सर्वाधिक है, इस कारण मुस्लिमों को समाजवादी पेंशन का लाभ पहुंचाया गया। सपा सरकार का यह अच्छा कदम था। बीजेपी को पेंशन नहीं रोकनी चाहिए।
बिना भेदभाव के सबको मिलना चाहिए था लाभ
मुजफ्फरनगर। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदीश पांचाल का कहना है कि समाजवादी पेंशन में अति पिछड़ी जातियों के साथ भेदभाव हुआ। मुस्लिमों की संख्या तो 25 से 45 प्रतिशत तक कर दी गई। अतिपिछड़े गरीबों का कोई ध्यान नहीं रखा गया। अति पिछड़ी जातियों में कश्यप, नाई, लुहार, कुम्हार आदि ऐसी जातियां हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इन जातियों को समाजवादी पेंशन में सम्मान नहीं दिया गया। पेंशन पात्रता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के मिलनी चाहिए।