मंसूरपुर। शुगर मिल परिसर में बसंत कालीन गन्ना बुवाई विषय पर कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें गन्ना विशेषज्ञों ने गन्ने में लगने वाले कीट रोग तथा उनकी रोकथाम के बारे में विस्तार से चर्चा की।
गोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र शामली के गन्ना विशेषज्ञ विकास मलिक ने किसानों से ट्रेंच विधि से गन्ना बोने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस विधि से गन्ने की बुवाई करने से कम बीज लगेगा, कम लागत में अधिक उत्पादन होगा। बंबूली नाशक से शोधित करके ही गन्ने की बुवाई करें। मृदा परीक्षण कराकर पोषक तत्वों की पूर्ति करें, अनावश्यक रुप से रासायनिक खादों का प्रयोग ना करें। गन्ने की फसल में 10 से 12 बार पानी से सिंचाई करें। उन्होंने फसल चक्र अपनाने पर भी जोर दिया। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे। गन्ने की फसल में लगने वाले विभिन्न रोगों तथा कीटों की रोकथाम के बारे में विस्तार से बताया। गन्ने के बीज के लिए एक से दो आंख वाले गन्ने के टुकड़े का ही प्रयोग करें। गन्नों की नालियों पर मिट्टी अवश्य चढ़ाएं। जिससे बरसात में तेज हवा से गन्ना न गिरे।
शुगर मिल के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार दीक्षित ने सभी किसानों का धन्यवाद करते हुए मिल चलाने में सहयोग की अपील की। गन्ना महाप्रबंधक बलधारी सिंह ने शुगर मिल द्वारा किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। गोष्ठी में भाकियू पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष चंद्रपाल फौजी, प्रदीप राठी, जिला गन्ना अधिकारी आरडी द्विवेदी, समिति सचिव सतीश कुमार, अंगद प्रधान, जेष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक उपेंद्र, अरुण कुमार, मनोज जड़ौदा, सोम प्रकाश, मुनेश कुमार, जगपाल जोहरा, भूपेंद्र राठी, सीटू त्यागी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता ओंकार ने और संचालन ओएन तिवारी ने किया। जड़ौदा के किसान महावीर सिंह को 120 क्विंटल प्रति बीघा का उत्पादन करने के लिए शुगर मिल द्वारा सम्मानित किया गया।