ईश्वर पार्श्वनाथ का जीवन चरित्र हम सभी को प्रेरणा देता है
खतौली। जैन मंडी में स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में तीन दिवसीय शिखर पताका व कलशारोहण महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य पंडित जय निशांत के मार्गदर्शन में मज्जिनेंद्र यागमंडल विधान का मांगलिक क्रियाओं के साथ अर्घ्य समर्पित करते हुए आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर सौधर्म इंद्र प्रदीप टीकरी बने। मुख्य कलश स्थापना का सौभाग्य सुभाष जैन, मनीष जैन परिवार को प्राप्त हुआ। ईशान इंद्र रवि जैन, प्रियंका जैन बने। ज्ञान के दीप का प्रज्वलन विजय जैन सराफ ने किया। जिनवाणी स्थापना सुशील जैन, उमंग जैन ने की। विधान हेतु सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य नवीन पुली को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विधानाचार्य जय निशांत व आशोक शास्त्री ने कहा कि मंदिर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की अतिशयकारी प्रतिमा है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन चरित्र हमें जीवन में समता भाव धारण करने की शिक्षा देता है। भगवान पार्श्वनाथ ने सभी तीर्थ क्षेत्र जनमानस की श्रद्धा भक्ति से हम मनवांछित फल की प्राप्ति कर सकते हैं। श्रीजी की दीपकों से आरती की गई। महिला जैन मिलन के सौजन्य से भजन संध्या का आयोजन डा. ज्योति जैन के निर्देशन में किया गया। शंका समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। लकी ड्रा के द्वारा पुरस्कार वितरित किया गया। इस अवसर पर सिद्धार्थ, अरुण, प्रवीण, राजीव मार्बल, विनोद, संजय किरयाना, संजीव अरिहंत, नीरज, मनोज, हंस कुमार, अनुराग, नीरज जैन प्रवक्ता, दर्शिता, पारिका, रीतिका, मंजू, बबीता, अंजली, पल्लव, आयुष, तुषांग, पारुल, जनेश्वर, अनिल सराफ आदि मौजूद रहे।