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कहीं खिला कमल, कहीं दिखा पंजे का जादू

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कहीं खिला कमल, कहीं दिखा पंजे का जादू
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिकाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला नजर आया। सपा और बसपा प्रत्याशियों में तीसरे नंबर के लिए संघर्ष दिखाई दिया। मतदाताओं के बदले रुख से सियासी दिग्गज भी हैरान हैं। भाजपा, सपा और बसपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी हुई। मुस्लिमों ने भी एक पार्टी को पसंद नहीं किया और उनका वोट कई दलों में बंट गया। ब्राह्मण भाजपा और दलित बसपा के साथ पूरी तरह एकजुट रहे, जबकि सपा ने अतिपिछड़ों में बढ़त बनाई।
पालिकाध्यक्ष पद के चुनावी रण में मतदाताओं ने सियासी पार्टियों को अचंभित कर दिया। चुनाव के रुझान में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा। भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल मतदाताओं के बीच पहली बार चुनाव मैदान में थीं। पार्टी सिंबल पर लड़े गए चुनाव में वोटरों ने भी अंतिम समय तक खामोशी बनाए रखी। रविवार सुबह जैसे-जैसे मतदान की प्रक्रिया तेज रही, वैसे ही रुझान दिखाई दिया। भाजपा के गढ़ में कमल के साथ हाथ का पंजा भी चला। शहर के अबूपुरा, लोहिया बाजार, सर्राफा बाजार, पंचमुखी, दाल मंडी, नया बांस, कृष्णापुरी, प्रेमपुरी, नुमाईश कैंप आदि क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस अधिक प्रभावी दिखाई दिए। यहां अधिकांश मतदान केंद्रों पर सपा और बसपा के बस्ते भी नजर नहीं आए। गांधी कालोनी, नईमंडी, भरतिया कालोनी, अग्रसेन विहार, गांधी नगर में मतदाताओं के बीच भाजपा और कांग्रेस पहली पसंद रहे। गाजावाली, रैदासपुरी, केशवपुरी, ब्रह्रमपुरी, धर्मपुरी, खादरवाला में बसपा के पक्ष में ज्यादा मतदान हुआ। बसपा प्रत्याशी मुदस्सिर रहमान को दलितों का एकजुट साथ मिला, मगर मुस्लिम हाथ से फिसल गए।
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मुसलिम बहुल मल्हूपुरा, लद्दावाला, मिमलाना, किदवईनगर और खालापार में वोटर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालते नहीं दिखे। मुस्लिम वोटरों में कांग्रेस पहली पसंद बन गई। सपा और बसपा के बीच भी मतों का बंटवारा हुआ। रामपुरी, आनंदपुरी, महमूदनगर, एकता विहार, इंदिरा कालोनी और सरवट रोड से जुड़ी बस्तियों में अतिपिछड़ों में सपा और भाजपा का ज्यादा रुझान रहा। त्यागी कालोनी और फ्रेंड्स कालोनी में कमल पहली पसंद रहा। मतदाताओं के बदले रुझान से सियासी महारथी भी हैरत में हैं। प्रत्याशियों को लेकर कुछ ही जातियां एकजुट हो पाईं। ब्राह्मणों में भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा का ही असर रहा। ऐसे ही दलितों में बसपा प्रत्याशी मुदस्सिर को ही ज्यादातर वोट पड़े। वैश्य मतों में पहली बार बंटवारा देखा गया है। संसदीय और विधानसभा चुनाव में वैश्य और ब्राह्मण भाजपा के साथ खड़े रहे हैं। पालिका चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल के पक्ष में वैश्यों ने बड़ी संख्या में मतदान किया है।
सपा प्रत्याशी मिथलेश पाल मुस्लिमों में उम्मीद के अनुरूप वोट नहीं ले पाईं। वह अतिपिछड़ों के वोटों तक ही सीमित रहीं। दक्षिणी सिविल लाइन, आनंद विहार, ऋषभ विहार, शिक्षक कालोनी और संतोष विहार में भाजपा का वर्चस्व रहा। रालोद समर्थित मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट दिया। मतदान के रुख को देखने से साफ जाहिर हो रहा है कि चुनाव परिणाम कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सिमट गया है। एक दिसंबर को मतगणना के बाद तय हो जाएगा कि पालिका की चेयरमैन कौन बनेगी।
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परंपरागत वोट में बंटवारा
मुजफ्फरनगर। सियासत बड़े-बड़े समीकरण को हाशिए पर ले जाती है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मतों को लेकर ऐसा ही बंटवारा नजर आया। वैश्य और ब्राह्मण भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है। संसदीय और विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में दोनों ही बिरादरियों की अहम भूमिका रही। भाजपा ने ब्राह्मण और कांग्रेस ने वैश्य प्रत्याशी को टिकट दिया था। मतदान के दिन वैश्य समाज कांग्रेस और भाजपा में बंटता नजर आया। ब्राह्मण बहुल इंदिरा कालोनी और रामपुरी में कमल खिलता दिखा। पंजाबी समाज में भाजपा के साथ कांग्रेस ने भी भागीदारी की।
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