नादान चालकों के हाथ में स्कूली बसों की स्टेयरिंग
मुजफ्फरनगर। स्कूली वाहनों की जांच-पड़ताल में एआरटीओ की कार्रवाई सुस्त है। कई स्कूलों के वाहनोें की स्टेयरिंग नादान चालकों के हाथ में है। उधर, विभाग ने पांच माह में कुल 16 वाहनों को सीज किया गया है, जबकि 52 वाहनों को जांचा गया, जिनमें से 26 वाहनों के चालान काटकर 68 हजार रुपये का जुुर्माना वसूला गया है। वहीं, एआरटीओ ने स्कूली वाहनों के साथ चालकों, हेल्परों के बारे में भी जानकारी मांगी है।
जनपदभर में सैकड़ों स्कूल संचालित हैं, जिनमें बच्चों के ले जाने की व्यवस्था वाहनों से है। अधिकांश वाहन अनफिट होने के साथ मानकों पर भी खरे नहीं है। नादान चालकों के हाथों में वाहनों का स्टेयरिंग है, जिनके पास लाइसेंस तक नहीं है। इसमें सीधे तौर पर विभाग ने स्कूलों की लापरवाही मानी है। एआरटीओ कार्यालय में जिले में 300 स्कूली बस और 110 वैन पंजीकृत है। वाहनों का आंकड़ा यहां दो हजार के पार है, जिन्हें पकड़ने में एआरटीओ आंखें मूंदे हुए है। सोमवार को एआरटीओ ने स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं। जिनमें कहा गया कि स्कूली वाहनों का ब्योरा देने के साथ चालक की भी जानकारी दी जाए। इतना ही नहीं स्कूली वाहन रोड पर सवारियां ढोते मिले तो वाहन सीज होने के साथ स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। एआरटीओ विभाग ने पिछले पांच माह में 52 स्कूली वाहनों की जांच पड़ताल की है. जबकि 26 वाहनों के चालान किए गए। 16 वाहनों को सीज किया गया। विभाग ने 68 हजार रुपये बतौर जुर्माने के रूप में वसूले हैं। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि स्कूली वाहनों की जांच-पड़ताल के साथ प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों से चालकों की डिटेल मांगी गई है। अवैध रूप से चल रहे स्कूली वाहनों को नहीं चलने दिया जाएगा।