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12 विद्यालयों में नहीं हैं एलपीजी कनेक्शन

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लकड़ी और उपले जलाकर बन रहा मिड-डे मील
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मुजफ्फरनगर। जनपद में 1100 से अधिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें बेसिक शिक्षा विभाग ने केवल 12 विद्यालयों में गैस कनेक्शन न होने का दावा किया है। इनमें बच्चों के लिए बनने वाला भोजन लकड़ी और उपलों को जलाकर बनाया जा रहा है। सूची पर शक होने के कारण शासन ने पुन: निरीक्षण की दोबारा सूची मांगी है।
बेसिक शिक्षा परिषद के तहत जनपद में करीब 1163 विद्यालय संचालित हैं। जिनमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक वर्ग के विद्यालय है। इनमें जो नगर में विद्यालय बने हैं, उनके लिए मिड-डे मील एनजीओ या टेंडर के माध्यम से बनता है। जबकि ग्रामीण अंचल में ग्राम प्रधान, प्रधानाध्यापक के सहयोग से रसोई चलती है। नया सत्र प्रारंभ होने से पहले ही शासन ने जिलेवार एलपीजी कनेक्शन विहीन विद्यालयों की सूची मांगी थी। जिस पर बीएसए के स्तर से जनपद के 12 विद्यालयों को एलपीजी विहीन माना गया। इनकी सूची बनाकर शासन को भेजी गई। जिन विद्यालयों की सूची भेजी गई। उनमें भोजन बनाने के लिए चूल्हे पर लकड़ी, उपले जलाए जा रहे हैं।
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इससे मिड-डे मील भोजन में गंदगी गिरने का भी खतरा है। शासन ने विभाग की सूची पर सवाल उठाए हैं। कहा कि सूची पर संदेह है। बीएसए एक बार पुन: निरीक्षण कर कनेक्शनों के बारे में जानकारी दें। उसके बाद ही प्रदेश सरकार विद्यालयों में गैस कनेक्शन मुहैया कराने के लिए सत्र 2017-18 का बजट जारी करेगी। बीएसए चंद्रकेश यादव ने बताया कि कांवड़ यात्रा में ड्यूटी होने के कारण सूची का अवलोकन नहीं किया जा सका है। जिन विद्यालयों में कनेक्शन नहीं है, शासन ने उनकी सूची मांगी थी।
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बताएं, कहां कहां नहीं बन रहा मिड-डे मील
प्रदेश सरकार ने कहां कहां मिड-डे मील नहीं बन रहा है। इसके बारे में भी जानकारी मांगी है। नए सत्र में कम से कम ऐसे दस विद्यालयों के बारे में पूछा है, जहां मिड-डे मील बनाने में परेशानी आ रही है। इसको लेकर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
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