फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी की उलझन, व्यापार की कशमकश

विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। जीएसटी को शोरशराबे के बीच लागू तो कर दिया गया। हालांकि व्यापारियों को जीएसटी के बारे में सरलता से समझाया नहीं गया। अधूरी तैयारियों के बीच व्यापारियों को जीएसटी की पटरी पर खड़ा तो कर दिया गया है, लेकिन गाड़ी का स्टेयरिंग कहां-कहां घूमेगा, इसकी सटीक जानकारी से व्यापारी तबका अनभिज्ञ है। हालांकि जिले में वाणिज्यकर विभाग 135 से अधिक सेमिनार आयोजित करने का दावा किया है। जीएसटी का सॉफ्टवेयर बनने में अभी वक्त की वकालत की गई है।
विज्ञापन

गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) वह प्रणाली, जिनसे रोजमर्रा के साथ अन्य उपभोग में आने वाली वस्तुओं से केंद्र ने राज्यों के दर्जनभर टैक्स से मुक्ति दे दी। यह राहत सीधे ग्राहक के खाते में गई, लेकिन कारोबार करने की सरल भाषा ढंग से पेश नहीं हो सकी। इससे पहले दिन ही कारोबार बैशाखी के सहारे टिका दिखा। सबसे अहम तो यह है कि जीएसटी लागू कर दिया गया। कारोबारी कहां अपने क्रय-विक्रय की फीडिंग को अंजाम देगा, इससे पर्दा नहीं हटा। जीएसटी का कारोबारियों को सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं कराया गया है। वहीं, मध्यम वर्ग के व्यापारी खासे परेशान रहे। जिले में व्यापार की हालत तब खराब रही, जब वाणिज्यकर विभाग 135 से अधिक सेमिनार करने का दावा कर रहा है। दस दिनों का विशेष अभियान चलाया गया। व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन, पंजीकरण की बातें बताई गई, लेकिन कारोबार किस ढंग से होगा, यह नहीं साफ हो सका है।
व्यापारियों में जीएसटी की उलझन नहीं सुलझ पाई, जबकि कारोबार करने की कशमकश ने दिल बेचैन कर दिया। जीएसटी के जिला नोडल अधिकारी डीएस गौतम ने बताया कि व्यापारी जीएसटी में कारोबार का प्रारूप की मांग कर रहे हैं, जिसको छपवाने की केंद्रीय सरकार ने अनुमति नहीं दी है। जीएसटी में उलझन कुछ नहीं है। हेल्प डेस्क व्यापारियों के लिए बनाई गई है। व्यापारी अपनी सभी शंकाओं का समाधान करा सकता है।
विज्ञापन

बाजार में लगाने पड़ेंगे अभी कैंप
मुजफ्फरनगर। वाणिज्य कर विभाग को जीएसटी के माइग्रेशन और पंजीकरण के साथ ही इसके माध्यम से सरलता से व्यापार के लिए कैंप लगाने पड़ेंगे, जिसमें व्यापारियों को जीएसटी में कारोबार के 16 बिंदुओं समेत बिल बनाना, फीडिंग करने के साथ ही लेखा-जोखा रखने के तरीकों की जानकारी देनी होगी, तभी जीएसटी की गाड़ी बाजार में गति पकड़ सकती है।
सैकड़ों को नहीं मिला टीआरएन
मुजफ्फरनगर। वाणिज्य कर विभाग जीएसटी को लेकर शोरगुल करने में रहा, लेकिन शहर में सैकड़ों व्यापारियों को टेम्प्रेरी रेफरेंस नंबर (टीआरएन) जारी नहीं हो सका है। इससे भी जीएसटी के नियमों, कारोबार करने में परेशानी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें