ब्लाक खतौली के 84 गांवों में जल निगम की ओर से लगाए गए 2745 हैंडपंपों में से 234 हैंडपंपों के हलक सूखे हैं। 84 गांवों में से कई गांवों में हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। ठप हो चुके 234 हैंडपंपों को अभी तक रिबोर नहीं कराया गया है। गमीक़े मौसम से हाल बेहाल लोग हैंडपंपों के दो घूंट पानी को भी तरस गए हैं।
गांव भैंसी में गंदे नाले की वजह से हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। ग्रामीण तेजेंद्र चौधरी, गुड्डू, आशु सुधीर, धीरज आदि का कहना है कि जब तक हैंडपंप से तीन-चार बाल्टी पानी नहीं निकलता, इससे पहले पानी में बदबू आती है। गांव के दूषित पानी से पिछले कुछ सालों में बीमारी के चलते 10 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है।
कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं कराई गई। ग्राम प्रधान सुनील का कहना है कि गांव में तीन-चार हैंडपंप ठप पड़े हैं, जिनके रिबोर के लिए अधिकारियों को लिखित शिकायत की गई है। गांव अंबरपुर के पास से काली नदी गुजर रही है। नतीजतन गांव में लगे हैंडपंपों का पानी दूषित है।
ग्रामीण राजकुमार त्यागी, अनिल त्यागी, प्रताप, सतीश त्यागी, आदेश का कहना है कि शिकायतों के बावजूद शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्राम प्रधान मनीष का कहना है कि कई हैंडपंप ठप हैं, शिकायत करने पर अब उनको ठीक कराया जा रहा है। गांव भूड़ के प्रधान पति सुलेमान परदेसी का कहना है कि गांव में पांच हैंडपंप हैं। अधिकांश हैंडपंपों में शुगर मिल के तालाब की वजह से दूषित पानी निकलता है। ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
ब्लाक के गांवों में लगे 2745 हैंडपंपों में से 234 ठप होने की शिकायत मिली है, जिनको रिबोर कराने के लिए जल निगम को लिखकर भेजा गया है -योगेंद्र लाल भारती, बीडीओ।