गन्ने की फर्जी पर्ची से करोड़ों का खेल
मुजफ्फरनगर। जिले में गन्ने की पर्चियों का फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। गन्ना विभाग की जांच के बाद साढे़ आठ हजार मृतक और फर्जी किसानों के नाम हटाने के बाद भी लगभग पांच हजार से अधिक काल्पनिक किसानों के नाम पर्चियां आ रही हैं। ऐसे किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिन्हें जमीन के हिसाब से बहुत ज्यादा पर्चियां जारी हो रही है। ढाई बीघा के एक छोटे किसान को 90 पर्चियां जारी होने का खुलासा हुआ है। ऐसी ही फर्जी पर्चियों के सहारे प्रतिदिन हरियाणा का 25-30 हजार क्विंटल गन्ना चीनी मिलों में पहुंच रहा है। माफिया बीच में करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं, इसमें विभाग, समिति, मिल कर्मियों और माफियाओं का बड़ा गठजोड़ है।
रात में प्रतिदिन हरियाणा के ट्रैक्टर-ट्राली शामली से मुजफ्फरनगर की सीमा में प्रवेश करते हुए देखे जा सकते हैं। लगभग 25-30 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन जिले की चीनी मिलों में खप रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि कितने बड़े स्तर पर फर्जी पर्चियां यहां जारी हो रही है। विभाग इन हाल ही में लंबे समय से चली आ रही मृतक और काल्पनिक किसानों की साढ़े आठ हजार फर्जी पर्ची निरस्त भी की थी। लुहारी खुर्द के शाहिद हुसैन ने प्रदेश के गन्ना आयुक्त को शिकायत की है कि जिले में 100 करोड़ से अधिक का गन्ना चीनी मिलों में नंबर दो में जा रहा है। फर्जी पर्ची के खेल में समिति, विभाग, मिल और माफिया का बड़ा गठजोड़ है। शिकायत में उसने ऐसे कुछ किसानों की सूची भी विभागीय अधिकारियों को भेजी है, जिन्हें जमीन के औसत से 50 गुना तक पर्ची जारी कर दी गई। उन काल्पनिक किसानों के नाम भी भेजे है, जिन्हें कई वर्षों से फर्जी नाम और पते पर पर्ची जारी हो रही है। ऐसे किसानों के नाम भी दिए, जिन्हें जमीन के हिसाब से काफी कम पर्चियां जारी हो रही है। चार दिन पूर्व सपा नेताओं ने पर्ची घोटाले की जांच की मांग की थी। फर्जी पर्ची के इस बड़े खेल पर डीसीओ आरडी द्विवेदी का कहना है कि काफी सुधार हुआ है, लेकिन व्यवस्था को एक दिन में नहीं सुधारा जा सकता। उन्होंने हरियाणा के गन्ने की आपूर्ति को सिरे से नकार दिया।