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गड़ढों में समाई सड़क, चलना हुआ दूभर

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चरथावल। धूल भरी टूटी सड़क से सफर रोजमर्रा की आफत बन गया है। कस्बे से शामली के थानाभवन तक पहुंचने को बीते दो साल से क्षेत्रीय लोग परेशान हैं। क्योंकि 10 किमी की सड़क गड्ढों में खत्म हो चुकी है। कंकरीट पर दौड़ते वाहन धूल के गुबार से गुजरते हैं। सांस लेना भी दूभर हो गया है। अहम बात यह है कि चरथावल-थानाभवन मार्ग से तीन विधानसभा क्षेत्र जुडे़ हैं।
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चरथावल से बिरालसी तक सड़क की हालत ज्यादा खराब है। गड्ढों में सफर के लिए वाहनों को सड़क तलाशनी पड़ती है। बीते दो साल में यह सड़क टूटकर पूरी तरह खुर्द-बुर्द हो गई है। वाहनों के आवागमन के वक्त टूटी हुई रोड़ियां राहगीरों और दुपहिया वाहन चालकों को जख्मी कर रही है। गड्ढों में फंसकर आए दिन बस, कार और अन्य वाहन खराब हो रहे हैं। सड़क किनारे दुकानों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए उड़ती धूल बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। यह अकेला सड़क मार्ग है, जो चरथावल को मुजफ्फरनगर और थानाभवन क्षेत्र से जोड़ता है। सहारनपुर, शामली और दिल्ली तक भी इसी सड़क मार्ग से जाते है। आने जाने को सुदृढ़ सड़क नहीं होने से आर्थिक संकट भी बढ़ रहा है। व्यापार और खेती किसानी के काम प्रभावित हो रहे है। यहां से लकड़ी की आपूर्ति हरियाणा के यमुनानगर तक होती है। भट्ठा उद्यमियों को परेशानी है, क्योंकि ईंटों की आपूर्ति उत्तराखंड में करना मुश्किल हो गया है।
सड़क मार्ग से सीधे 24 से ज्यादा गांव जुड़े है। कस्बे और शहर में पढ़ रहे युवाओं के लिए समय से स्कूल पहुंचना कठिन है। रोगियों और प्रसूता महिलाओं को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के विकास में बाधा बनी सड़क को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। इस मार्ग पर चंद्रशेखर आजाद कॉलेज की प्राचार्या डॉक्टर सविता वशिष्ठ, भट्ठा कारोबारी अमित सिंघल, पीपलशाह प्रधान प्रद्युमन पुंडीर, तनवीर बताते हैं कि अलावा अस्थमा वाले मरीजों को परेशान होना पड़ता है। छात्र-छात्राओं में सड़क की दुर्दशा के कारण आक्रोश है।
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