पहले दिन जीएसटी को लेकर व्यापारियों में असमंजस बरकरार रहा। कारोबार काफी प्रभावित हो गया। अभी तक कई वस्तुओं पर दरों को लेकर ऊहापोह की स्थिति होने से व्यापारियों की उलझनें काफी बढ़ गई है। शनिवार को दुकानें खुलीं। खरीदार भी आए। कई खरीददार जीएसटी के बाद मूल्य सुना और चुपचाप चले गए। पहले दिन जीएसटी के स्टेशन से व्यापारी की गाड़ी का सायरन नहीं बजता दिखा। इलेक्ट्रानिक, कपड़ा, जूता, हार्डवेयर, मेडिकल, सराफा समेत शहरभर के व्यापारी खाली बैठे रहे।
जिला परिषद मार्केट:
जिला परिषद मार्केट दवाइयों का मुख्य बाजार है। जीएसटी लागू होने के बाद यहां व्यापारी भ्रमित दिखाई दिए। जीएसटी में कारोबार किस तरह से होगा अभी तक वाणिज्य कर विभाग यह सरल रूप में सामने नहीं ला सका है। दवा कारोबारी शशि गुप्ता ने कहा कि फिलहाल तो वही टैक्स देय हो रहा है, जो पहले था। जीएसटी के सही नियमों की जानकारी नहीं है। यहां अधिकांश व्यापारी कच्चे बिल, रफ रजिस्टर में दवाईयों का लेखा-जोखा लिखकर कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि सैकड़ों प्रकार की दवाइयां हैं। सभी पर पांच प्रतिशत टैक्स नहीं है। दवाइयों की ब्रिकी की एंट्री करने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
लाल सिंह कपड़ा मार्केट:
जीएसटी को लेकर सबसे अधिक शोर कपड़ा मार्केट में ही है। व्यापारियों का दो टूक जवाब है कि 70 साल में कभी कपड़ा टैक्स के दायरे में नहीं आया है। मार्केट की दुकानें खुली हैं, कुछ दुकानों पर खरीदार भी हैं। व्यापारी जीएसटी के नियमों को जानने में लगे हैं। कपड़ा थोक बाजार पूरी तरह से प्रभावित रहा। थोक व्यापारी दिनेश मलिक ने बताया कि शनिवार का दिन कारोबार के लिए बेहतर होता है, लेकिन जीएसटी के पहले ही दिन कारोबार की नैया डूब गई। कई डीलरों को कपड़ा जाना था, मगर जीएसटी लगते ही उठाने से इंकार कर दिया। उन्हें भी बिल बनाने और जीएसटी रजिस्टर को मैनटेन करने में परेशानी हो रही है। क्या करें और किस तरह से अब व्यापार होगा है यह पहेली बन गया है।
सराफा बाजार में मायूसी:
शहर सराफा बाजार में जीएसटी के असर से मायूसी का आलम है। दुकानें खोले बैठे सराफा कारोबारी ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि सोने को 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब में रखा गया है। कारोबार बचाने की जुगत में लगे व्यापारियों ने जीएसटी में माइग्रेशन करा लिया है, लेकिन यूजर आईडी और पासवर्ड नहीं मिला है, जिससे पहले दिन कारोबार करना अधिक कठिन रहा। हालांकि सोने के आभूषणों को कारोबारियों ने स्टॉक कर लिया है, जबकि चांदी की खरीदारी रही। कारोबारी पवन वर्मा ने कहा कि जीएसटी के कारण सोने के दाम उछलेंगे और डिमांड घटेगी। वर्तमान में भी साये का सीजन शुरू होगा, लेकिन ग्राहक अब तक एक प्रतिशत टैक्स देता आया है, जो तीन प्रतिशत हो गया। एंट्री करना, बिल बनाना और भुगतान तीनों पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
जूता कारोबार भी पड़ा सुस्त
भगत सिंह मार्केट में चहल-पहल जरूर है, लेकिन ग्राहकों का सस्ती चीजों की खरीदारी पर जोर रहा। जूता कारोबार में अब बिल बनने लगा है। जीएसटी समझ से परे होने के बावजूद भी व्यापारियों ने कच्चे बिल पर अपना कारोबार किया। हालांकि कारोबार ठंडा रहा। व्यापारियों ने सीधे कहा कि पहले नोटबंदी अब जीएसटी कारोबार और परिवार दोनों के लिए मुसीबत हो गई। जूता व्यापारी मोहम्मद इनाम ने कहा कि अधिकारियों ने जीएसटी के बारे में सही जानकारी नहीं दी है। जूते पर कितना जीएसटी लगा है कोई नहीं बता सका।
कॉस्मेटिक बाजार से रौनक गायब
शहर में कॉस्मेटिक बाजार भी जीएसटी के कारण धरातल में समाया हुआ दिखा। कारोबारी खाली बैठे रहे, क्योंकि सौंदर्य प्रसाधनों के उत्पादों पर 28 फीसदी कर लगाया गया है। जीएसटी किस स्तर के व्यापारियों को शामिल किया गया है विभाग यह साफ नहीं कर सका। पहले दिन कारोबार करना दूभर दिखाई दिया। व्यापारी चंदन ने कहा कि सहालग चलने वाले हैं, लेकिन जीएसटी लगने से ग्राहक दूर हो गए। कुछ आए भी तो पक्का बिल लेने से हाथ खड़े कर दिए, क्योंकि अभी तक जो वस्तु बाजार में 50 की जीएसटी लगने पर वह 55 से 60 रुपये तक पहुंच गई। इससे बड़ी दिक्कतों का व्यापारियों को सामना करना पड़ा। व्यापारी जीएसटी को समझने की कोशिश में लगा है, लेकिन ग्राहक को कैसे बताया जाए कि उन्हें टैक्स के दायरे में व्यापार कर वस्तु विक्रय करनी है।