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भागवत भूमि शुक्रताल को मिला शुकतीर्थ का नाम

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भागवत भूमि शुक्रताल को मिला शुकतीर्थ का नाम
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मुजफ्फरनगर। पौराणिक तीर्थ शुक्रताल का नाम प्रदेश सरकार ने शुकतीर्थ कर दिया है। राजस्व अनुभाग-एक ने अधिसूचना जारी कर दी है। जिले की जानसठ तहसील के राजस्व अभिलेखों में शुक्रताल खादर तथा शुक्रताल बांगर ग्राम पंचायत है। केंद्र सरकार की अनापत्ति के बाद राज्यपाल रामनाईक ने नाम परिवर्तन की अधिसूचना को स्वीकृति प्रदान कर दी। अब राजस्व अभिलेखों में शुकतीर्थ खादर और शुकतीर्थ बांगर दर्ज किया जाएगा।
श्रीमद्भागवत कथा की उद्गम स्थली एवं महाभारत कालीन तीर्थ शुक्रताल का नाम अब शुकतीर्थ हो गया है। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याण देव ने ऐतिहासिक तीर्थ के नाम को बदलने का प्रयास दो दशक पहले प्रारंभ किया था, मगर पत्रावलियां सरकारी फाइलों में दबी रही। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती शुकतीर्थ नामकरण को लंबे अरसे से प्रयासरत रहे। वर्ष 2015 में शिक्षा ऋषि की पुण्यतिथि पर शुक्रताल आए राज्यपाल रामनाईक को ज्ञापन दिया गया। लखनऊ में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से भेंट कर स्वामी ओमानंद ने वर्षों से लंबित शुक्रताल के नाम परिवर्तन की मांग रखी। इस संबंध में डीएम ने राजस्व परिषद को वर्ष 2016 में पत्रावली भेजी थी। सहारनपुर मंडल के तत्कालीन आयुक्त एमपी अग्रवाल ने विशेष रुचि ली और नाम परिवर्तन का प्रस्ताव बना कर शासन को भेजा। राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव ने पांच सितंबर 2016 को तहसील जानसठ के राजस्व ग्राम शुक्रताल खादर और शुक्रताल बांगर का नाम परिवर्तन की संस्तुति कर दी। भूमि प्रबंधक समिति द्वारा उक्त राजस्व गांव के नाम परिवर्तित किए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र सरकार ने 4 अगस्त 2017 को शुक्रताल का नाम शुकतीर्थ किए जाने पर अनापत्ति प्रदान कर दी। गृह मंत्रालय की प्रक्रिया के बाद यूपी के राज्यपाल रामनाईक ने अधिसूचना के गजट में नाम परिवर्तन को स्वीकृति दे दी है। अब राजस्व ग्राम की अनुसूची में राजस्व ग्राम नया नाम शुकतीर्थ खादर और शुकतीर्थ बांगर हो गया है। राजस्व अनुभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने 30 अगस्त 2018 को यह अधिसूचना जारी की है।
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गवर्नर और सीएम का आभार: ओमानंद
मुजफ्फरनगर। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने पौराणिक तीर्थ शुक्रताल का नाम शुकतीर्थ किए जाने पर गवर्नर रामनाईक और सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव के ब्रहमलीन होने के बाद नाम परिवर्तन के संदर्भ में केंद्र और प्रदेश सरकार को कई पत्रावलियां दी गई थी। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने पहल पर गंभीरता बरती थी। जुलाई 2018 में लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात में आग्रह किया गया तो अंतत: कामयाबी मिल गई। पुराणों और भागवत में तीर्थ का नाम शुकतार था, जो अपभ्रंश होते हुए शुक्रताल के नाम से प्रसिद्ध हो गया। सरकार के फैसले से तीर्थ के संतों और महात्माओं की ओर से भी हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
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