आज्ञा का पालन करना ही सबसे बड़ी सेवा
मोरना। भागवत कथा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि कर्म के हेतु है राग, द्वेष, सुख में राग, दुख में द्वेष है, इसलिए प्राणी विषय सुख की प्राप्ति के लिए कर्म करता है। दुखों से बचने का उपाय करता है। इसी से पुण्य पाप, कर्म होते हैं।
दंडी आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी भागवत संत के रूप में विख्यात स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 14वीं पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि आज्ञा पालन करने के साधन के समान कोई दूसरी सेवा नहीं मानी जाती है। आज्ञा का पालन करना ही सबसे बड़ी सेवा है। जैसे ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं हो सकती, चाहे कितने ही उपाय करो। उसी प्रकार भक्ति के बिना ज्ञान का उदय नहीं हो सकता, चाहे जितने भी उपाय करो। भक्ति का उदय करके अमंगलमय संसार से वैराग्य कराती है। संसार में मनुष्य जन्म लेकर जो सदाचार का पालन करता है, दान, परोपकार करता है। भगवान उस प्राणी को अपनी कृपाओं को खजाना बरसाते हैं। यह संसार एक समुद्र है और विषय रूपी जल से भरा हुआ है। भगवान की माया से छुटकारा किसको मिलता है, जो लोभ, लालच, मोह आदि को छोड़कर महापुरुषों की सेवा करता है। कथा के आयोजक राजकुमार राज व पूनम ने ब्रह्मचारी गुरुदत्त महाराज को तिलक, पूजा अर्चना कर फूलमाला पहनाकर आशीर्वाद लिया। वहीं, कथा व्यास महाराज को महामंडलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने शाल ओढ़ाकर मिठाई, फल आदि देकर सम्मानित किया। इस मौके पर आनंद अवस्थी, केडी शर्मा, मनोहर लाल शर्मा, देवेंद्र अग्रवाल, आचार्य गिरीश वशिष्ठ आचार्य राजीव मिश्र, आचार्य उमाकांत, दिनेश पांडेय, बनवारी लाल शर्मा, विनोद शर्मा चेयरमैन आदि श्रद्धालुगण व साधु, संत मौजूद रहे।