मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में भागवत भक्तों ने कलश यात्रा निकाल कर प्रभु का गुणगान किया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि सदैव मधुर, हितकर और पवित्र वाणी का प्रयोग करें।
डोगरे भागवत भवन में कथा व्यास राघवेंद्र देशपांडे की कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत श्रवण करने से पवित्र भाव प्रकट होता है। भागवत हमें सदैव मधुर और हितकारी वाणी का प्रयोग करने की शिक्षा देती है। द्रोपदी को कहे अपमानजनक शब्द भी महाभारत की वजह बने। सदैव कटु वचन से बचें। सीमित और संकुचित दायरे से निकल कर व्यापकता के विचारों से जीवन बदलता है। ऐसे कार्य और विचारों का संरक्षण मूल करें, जिसमें आत्मा और लोकोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो। विनम्रता, सेवा और त्याग भारतीय संस्कृति के मूल आधार है। उधर, प्रतीक्षानंद भवन में कथा वाचक राजेंद्र महाराज की भागवत कथा का पीठाधीश्वर ने विधि-विधान से शुभारंभ किया। महाराष्ट्र के डोम्वीबली और बुलढाणा से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। इससे पूर्व, शुकदेव आश्रम में अक्षय वट वृक्ष की पूजा कर कलश यात्रा निकाली गई। बाद में कलश स्थापना कर कथाओं का शुभारंभ हुआ। सुमन शास्त्री, अचल कृष्ण शास्त्री, श्यामाचार्य, गिरीशचंद्र उप्रेती, विजय शर्मा, हर्ष मणि आदि मौजूद रहे।
समरसता का संदेश देती है होली
शुक्रताल। स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि होली दुष्प्रवृतियों पर सद् प्रवृतियों की विजय का पर्व है। भागवत भक्तों और श्रद्धालुओं ने दिनभर स्वामी से भेंट कर होली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रंगों के पर्व को स्नेह और भाईचारे से मनाए। होली नवचेतना, उत्साह एवं उमंग से भर कर भक्त प्रहलाद की भांति जीवन को प्रकाशमय बनाती है। समाज में फैली कुरीतियों और द्वेष को मिटा कर समरसता का संदेश देती है।