चार माह बाद सऊदी से आएगा आसिफ का शव
मुजफ्फरनगर।
चार साल पहले राजी-खुशी अनेकों सपने संजोए विदेश गया लाडला खुद नहीं उसकी लाश शुक्रवार को आएगी। जिंदगी की जुस्तजू में मौत के आगोश में समाया आसिफ मां-बाप, भाई-बहनों की आंखों में आंसू और दिल रंजो गम में छोड़ गया। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की गरज से सऊदी गया आसिफ जिंदगी हार गया। करीब साढ़े चार माह बाद उसका शव वतन पहुंचेगा। आसिफ की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों के मुताबिक लगभग चार साल पहले शहर की जामिया कालोनी निवासी मोहम्मद अखलाक बेग का सबसे बड़ा बेटा (22) आसिफ बेग सऊदी अरब में बतौर मैकेनिक कार्य करने के लिए गया था। हाईस्कूल पास आसिफ काम में होशियार होने के साथ सबका लाडला था। आसिफ सऊदी अरब की राजधानी जद्दा की बैतुल किमिया कंपनी में कार्यरत था। बीती 24 जुलाई को कंपनी के निर्देश पर आसिफ अपने एक साथी उजैफा और पाकिस्तान निवासी असलम के साथ केमिकल के बॉयलर की रिपेयरिंग करने गया था। ब्यॉलर में उतरने के बाद तीनों बेहोश हो गए। कंपनी के लोगों ने उन्हें बाहर निकाला। हादसे में आसिफ की मृत्यु हो गई। परिजनों को खबर मिली तो कोहराम मच गया। पिता अखलाक और मां शमा परवीन ने बेटे का शव भारत लाने के लिए खूब जद्दोजहद की। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा सऊदी सरकार से भी अर्जी लगाई, मगर आसिफ का शव नहीं आ सका। अब कड़ी जद्दोजहद के बाद सऊदी सरकार ने आसिफ के शव को भारत भेजने के लिए मंजूरी दी है। शुक्रवार सुबह 4 बजकर 40 मिनट पर सऊदी से आसिफ का शव दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पहुंचेगा। यहां से परिजन उसके शव को शहर में लाकर सुपुर्द-ए खाक करेंगे। मृतक आसिफ के चाचा अफजाल बेग ने बताया कि सऊदी और भारत सरकार की हीलाहवाली के कारण आसिफ का शव आने में इतना वक्त लगा है।
परिवार के सदस्यों पर टूटा गम का पहाड़
मुजफ्फरनगर। परिवार में सबसे बड़ा आसिफ मां शमा परवीन, पिता अखलाक बेग का दुलारा था। छोटे भाई आकिब बेग, अमन बेग और छोटी बहन अफ्शा परवीन और अरशी परवीन के लिए भी सबकुछ था। विदेश भेजते वक्त भाई-बहनों ने भी आसिफ को सलामत रहने की दुआएं दी थीं, लेकिन वक्त को कुछ और मंजूर था। यह किसी को मालूम नहीं चला। हादसे के बाद से अब तक परिवार हर रोज आसिफ को याद करता है। भाई-बहनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उधर, परिजनों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजकर बेटे का शव भारत लाने के लिए गुहार लगाई थी, तब भारतीय दूतावास ने 24 घंटे का समय दिया था, लेकिन वक्त चार माह का बीत गया। आसिफ का शव आने की खबर से बृहस्पतिवार को जामियानगर में भी शोक छाया रहा। परिवार को सांत्वना देने के लिए परिचितों के साथ अन्य का तांता लगा रहा।