मुजफ्फरनगर। कुदरत तो गोद भर रही, लेकिन गर्भवती का कुपोषण आंगन की किलकारियों पर भारी पड़ रहा है। दुनिया में आने से पहले ही नवजात दम तोड़ रहे हैं। बीते दो साल में 1073 नवजात ने मां के गर्भ में ही दम तोड़ दिया है। अधिकांश मौतों के पीछे गर्भवती में खून की कमी, बच्चों की ग्रोथ कम होना और ब्लड प्रेशर जिम्मेदार निकला है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग भी हैरान है कि इन मौतों को कैसे रोका जाए। इसके लिए गर्भवती महिला और उसके परिवार की काउंसलिंग की जाएगी।
मां का कमजोर होना गर्भ में पल रहे नवजात को जान देकर चुकाना पड़ रहा है। दरअसल, मां जितनी कमजोर और बीमार होगी, उतना ही गर्भ में सांस ले रहे बच्चे के लिए खतरा बढ़ेगा। जनपद में गर्भवती महिलाओं को बीमारियों से बचाने के लिए मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण किया जा रहा है। मगर, कुपोषण को दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। बड़े पैमाने पर महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही हैं। इसके अलावा गर्भ के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ना अधिक घातक है। जिला महिला चिकित्सालय पर बीते दो साल में ऐसी एक दो नहीं बल्कि 1000 से अधिक गर्भवती महिलाएं पहुंची हैं। जिनके गर्भ में ही नवजात दम तोड़ चुका है। इन महिलाओं की डिलीवरी करने में विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अधिकांश बच्चों की मृत्यु औसत से भी कम वजन, (ग्रोथ), मां में खून की कमी और बीमार होना सामने आया है। इसके चलते नवजात दुनिया में आने से पहले ही रुखसत हो गए। अब गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए विभाग उन्हें फूड्स संबंधित टिप्स देगा, ताकि गर्भ में पल रहे बच्चों को भी ग्रोथ मिल सके।
औसतन हर माह 30 घटनाएं
आलम यह है कि औसत अनुरूप हर माह गर्भ में ही करीब 30 बच्चे दम तोड़ रहे हैं। इनमें सात, आठ माह तक के भी नवजात शामिल हैं। इसके लिए गर्भवती के परिजनों को भी जागरूक होना जरूरी है, ताकि उन्हें सही आहार मिले और शिशुओं की मृत्यु को रोका जा सके।
गर्भवती महिला को शुद्ध आहार
गर्भवती महिला को कैल्शियम, फॉलिक एसिड, आयरन, प्रोटीन, विटामिन बी 12, पर्याप्त मात्रा में पानी और फल।
बोली चिकित्सक...
जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी और कमजोरी अधिक मिल रही है। इसके चलते गर्भ में पल रहे नवजात को पूरी ग्रोथ नहीं मिल पाती है। मां का कुपोषण बच्चों को मृत्यु तक ले जा रहा है। गर्भ में होने वाली मौत का आंकड़ा जनपद में चौंकाने वाला है। - अमिता गर्ग, सीएमएस, महिला जिला चिकित्सालय।
वर्ष 2016 और 2017 में मृत्यु का आंकड़ा
माह-------वर्ष 2016--------वर्ष 2017
जनवरी--------44-------------31
फरवरी--------45-------------48
मार्च----------55-------------45
अप्रैल---------23-------------31
मई------------50-------------53
जून-----------34-------------33
जुलाई---------54------------31
अगस्त--------37------------54
सितंबर--------57------------30
अक्टूबर-------23------------55
नवंबर--------45-------------51
दिसंबर--------53------------59