लोक कल्याण को समर्पित है गऊ माता: ओमानंद
मुजफ्फरनगर। गोपाष्टमी पर्व पर शहर की गऊशालाओं में भक्तों ने गऊ माता का पूजन कर गोवंश के संरक्षण का संकल्प लिया। श्रीकृष्ण गऊशाला सभा में यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। उधर, शुक्रताल में भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गऊ माता भारतीय संस्कृति की जननी है।
नई मंडी स्थित गऊशाला में लोगों ने भक्तिभाव से गऊ पूजन किया। पुरोहितों ने मंत्रों के साथ विधि विधान से गऊ माता का पूजन कराया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। पचेंडा रोड स्थित कृष्णपुरम्म में श्रीकृष्ण गऊशाला सभा प्रन्यास में यज्ञमान जिले सिंह चौहान एवं विष्णु डंग ने हवन में आहुतियां दी। गऊ को वस्त्र ओढ़ाकर पूजा गया। तिलक और माला पहना कर गऊ वंश की सेवा का व्रत लिया गया। फूलचंद कंसल, कस्तूरी लाल मलिक, मित्रसेन कथूरिया, प्रेम प्रकाश अरोरा, राजेंद्र साहनी, संजय मलिक, महात्मा सर्वानंदपुरी आदि ने भाग लिया। यज्ञ ब्रहमा शांता प्रकाश, जेपी सिंह और श्रद्धा बहन रही। संस्था चेयरमैन जिले सिंह चौहान ने बताया कि गऊशाला में 295 गोवंश है। जन सहयोग से गऊओं की सेवा की जाती है। विधायक कपिलदेव अग्रवाल, श्रीभगवान, सुनील ग्रोवर, प्रधानाचार्या अनिता शर्मा, डॉ मनोज काबरा, विजय छाबड़ा, हेमलता भगत, संदीप जैन, त्रिशला जैन, ओमप्रकाश भाटिया, सरदार सुखदर्शन बेदी आदि मौजूद रहे।
मोरना। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में गोपाष्टमी पर्व पर गऊशाला में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कथा वाचक और भागवत भक्तों के साथ भक्तिभाव से गऊ पूजन किया। स्वामी ने कहा कि संपूर्ण जगत को भगवान श्रीकृष्ण को स्वयं गऊमाता की महिमा बताई है। गोपाष्टमी के दिन श्रीकृष्ण ने गोचारण लीला की और स्वयं गोपाल बन गए। संत ने कहा कि शास्त्रों में गऊ को समस्त प्राणियों की माता कहा गया है। ऋग्वेद के अनुसार गाय सारे विश्व की माता है। भारत की धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक समृद्धि में गऊ और गोवंश की महत्वपूर्ण भूूमिका है। राष्ट्र की कृषि की रीढ़ है। गऊ माता का दूध अमृत तुल्य है। गऊ का घृत, दही, मूत्र औषधि है। गऊ से जुड़ा एक विशाल अर्थतंत्र है। गऊ के तत्वों से ही जीवन रक्षा औषधियां तैयार की जाती है। गऊ अपने में असंख्य अमृत तत्व लिए लोक कल्याण के लिए जीवन जीती है। कथा वाचक पंडित केशवजी महाराज चित्रकूट ने कहा कि गऊ की सेवा पुण्य फल देती है। कथा व्यास सुमन शास्त्री, अचल कृष्ण शास्त्री, हर्षमणि, राजू आदि मौजूद रहे।