परंपरागत खेती से दूर होगा किसानों का संकट: देसाई
सिसौली (मुजफ्फरनगर)। कर्नाटक के प्रशिक्षक एवं गन्ने के जाने-माने विशेषज्ञ सुरेश देसाई ने कहा कि कृषि उत्पादन का आधार पारंपरिक स्रोत्र से है। किसान जानकारी के अभाव में इनका प्रयोग नहीं कर पा रहा है। जमीन में 111 मूल द्रव्य मौजूद हैं। इनके बैक्टीरिया भी मौजूद हैं, लेकिन किसान इनके अनुकूल खेती नहीं कर पा रहे हैं। किसानों के अंधाधुंध रसायनों, कीटनाशकों और खरपतवार नाशक के उपयोग से बैक्टीरिया मर जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है।
सिसौली के किसान भवन में दो दिवसीय गन्ने की जैविक और मिश्रित खेती पर आयोजित कार्यशाला के पहले दिन कर्नाटक से आए गन्ने के प्रमुख विशेषज्ञ सुरेश देसाई ने कहा कि गन्ने की खेती में चार मूल तत्वों की आवश्यकता है। हवा, पानी, जमीन, प्रकाश जो प्राकृतिक स्रोत्र से मिलते हैं। किसान इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। किसानों द्वारा फसल की दूरी कम करने के कारण प्रकाश नहीं मिलता, जिससे फसल में कीट रोग बढ़ते हैं। हवा में उपलब्ध घटक से कार्बन डाई ऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन के बिना पौधे को ताकतवर नहीं बनाया जा सकता। जमीन से बैक्टीरिया मिलता है। जल के अधिक प्रयोग से भी उत्पादन में कमी आती है, क्योंकि गन्ने में पानी नहीं नमी की जरूरत है। जमीन में सबसे अधिक ताकत हरी खाद से मिलती है। खेती के लिए पशुपालन भी बेहद जरूरी है।देशाई ने कहा कि हरी खाद का मतलब सनी-ढेंचा नहीं है। हरी खाद के लिए मिश्रण बहुत जरूरी है। उसके लिए खेत में उड़द, ज्वार, बाजरा, चना, मक्का, मेथी, धनिया, मूंग आदि बीज भी जमीन को मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि किसी भी फसल को तैयार करने के लिए केवल मिट्टी का 3.5 प्रतिशत योगदान है। जिला गन्ना अधिकारी ओपी यादव ने गन्ने की बुवाई की दूरी चार फीट किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आप दूरी बढ़ाकर सहफसली खेती से अधिक लाभ ले सकते हैं। कार्यशाला का शुभारंभ भाकियू अध्यक्ष चौ नरेश टिकैत ने किया। बैठक में चौधरी राकेश टिकैत, बिजेंद्र बालियन, सहदेव, सतीश, हनी बालियान, नीटू, ओमकार, रविंदर आदि किसान मौजूद रहे।