खतौली(मुजफ्फरनगर)।
आर्य समाज शिवपुरी में वेद प्रचार समारोह में कंवरपाल शास्त्री ने बताया कि गीता में श्रीकृष्ण ने कहा कि जो व्यक्ति देवताओं का भाग देवताओं को नहीं देता है, उसे पाप लगता है। इसीलिए यज्ञ की अग्नि के माध्यम से देवों का भाग देना चाहिए।
कहा कि जो नास्तिक और अधार्मिक होता है, उसे परमात्मा दुख भोगने के लिए छोड़ देता है। जैसे अग्नि के पास होने से शीत से मुक्ति मिलती है। वैसे ही परमात्मा की उपासना से दुखों से मुक्ति मिलती है। वेदों में 1184 बार यज्ञ करने का आदेश दिया है। अत: पांच यज्ञों को जीवन में प्रतिदिन करें। यज्ञ, तप एवं दान भी निशदिन करना चाहिए। महाशय घनश्याम प्रेमी द्वारा समाज को प्रेरणा देेने वाले गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में कीर्ति आर्य, हरिश्चंद्र आर्य, सुभाष ने भी विचार रखे। अजेश आर्य गुप्ता, पवन आर्य कौशिक, रणसिंह आर्य, ब्रजगोपाल आर्य, रामअवतार आर्य, मास्टर जयपाल सिंह, राजपाल आर्य, सुनील वर्मा आदि का सहयोग रहा। इससे पूर्व यमुना विहार में पारिवारिक यज्ञ हुआ। जिसमें मास्टर जगदीश सिंह प्रधान व पत्नी प्रभा देवी यज्ञमान रहे, जबकि रामदेश शास्त्री पुरोहित रहे। संचालन सत्येंद्र आर्य ने किया।