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संस्कारों की शिक्षा से निखरेगी युवा पीढ़ी: डॉ रघुवीर

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‘शिक्षा से निखरेगी युवा पीढ़ी’
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मुजफ्फरनगर। संस्कृत वाड्मय में निपुणता और शास्त्र में विशिष्टता के लिए राष्ट्रपति द्वारा देश में प्रथम पुरस्कार विजेता डॉ रघुवीर वेदालंकार का आर्य समाज नईमंडी में नागरिक अभिनंदन किया गया। वेदालंकार ने कहा कि संस्कारों की शिक्षा से ही देश की युवा पीढ़ी का जीवन निखरेगा। विद्यार्थी संस्कृत और वेदों के अध्ययन में रुचि लें।
दयानंद मार्ग स्थित आर्य समाज नईमंडी में आयोजित सम्मान समारोह में मूर्धन्य वैदिक विद्वान डॉ रघुवीर वेदालंकार को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने शॉल और सम्मान राशि भेंट की। आर्य समाज के संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजपाल सिंह चाहल, आनंदपाल सिंह और आरपी शर्मा ने अभिनंदन पत्र प्रदान किया। इस मौके पर वेदालंकार ने कहा कि बेटे-बेटियों को गुरुकुल और आर्य समाज में जाने को प्रेरित करें। भावी पीढ़ी को संस्कारों की शिक्षा नहीं दी जाएगी, तो उनका जीवन एकांगी हो जाएगा। जीवन जीने की कला बच्चे नहीं सीख पाएंगे। आर्य कुमार सभा की पुरातन संस्था को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। रामजस कॉलेज दिल्ली के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रघुवीर ने कहा कि आर्य समाज को आरएसएस की तरह संगठित होकर कार्य करना होगा। वैदिक संस्कृति की स्थापना से ही देश में सत्य, न्याय और आचरण स्थापित होगा। वैदिक चेतना संस्कार अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि विद्वानों के सत्कार से ही संस्कृति का संवर्धन होगा। डॉ रघुवीर ने देश में संस्कृत और वेदों की व्याख्या से जिले का गौरव बढ़ाया है। स्वामी सत्यवेश, स्वामी योगानंद, स्वामी जीलानंद, इंजीनियर कर्ण सिंह, गजेंद्र सिंह राणा, देवी सिंह सिंभालका, योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य, डॉ नीरज शास्त्री ने विचार रखे। इससे पूर्व, वेद मंत्रों से यज्ञ में यज्ञमान का दायित्व मंजू आर्य तथा राकेश देवी ने निभाया। खुशी आर्य ने प्रेरक भजन सुनाए। वेदपाल सिंह, सहदेव सिंह आर्य, प्रमोद आर्य, देवपाल आर्य, पवन आर्य, प्रियंका आर्य, अनिल त्यागी, पुष्पेंद्र कुमार आर्य, योगेश्वर दयाल आदि मौजूद रहे। संचालन आरपी शर्मा ने किया।
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25 से अधिक लिखी हैं पुस्तकें
मुजफ्फरनगर। जानसठ तहसील के गांव जड़वड़ कटिया में किसान हरिसिंह के घर जन्में डॉ रघुवीर वेदालंकार ने 37 वर्ष दिल्ली के रामजस कॉलेज में संस्कृत विभाग में अध्यापन किया है। उन्होंने संस्कृत और वेदों पर 25 से अधिक पुस्तकें लिखी। उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी लखनऊ ने उनकी कई पुस्तकों को पुरस्कृत किया। पैतृक गांव में महर्षि दयानंद इंटर कॉलेज तथा तेजलहेड़ा में सरदार पटेल शिक्षण संस्थान की नींव रखी। उनके सम्मान में गांव से छोटे भाई शिवशरण आर्य, विद्यावृत्त आर्य, निर्भय आर्य भी पहुंचे।
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