दलित संगठनों का जीआईसी मैदान में प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। जिले के दलित संगठनों ने गडरिया जाति को धनगर का एससी का प्रमाण पत्र जारी करने का विरोध किया। राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया। दलितों के प्रदर्शन को देखते हुए सुबह से ही जीआईसी में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालत ये थी कि प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस थी।
एससी में शामिल धनगर जाति के नाम पर गडरिया और पाल जाति का प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर अनुसूचित जाति में आक्रोश है। इसी के चलते जिले के तमाम दलित संगठनों ने जीआईसी के मैदान में विरोध प्रदर्शन किया। वाल्मीकि क्रांति दल के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि गडरिया, पाल, बघेल जाति को धनगर जाति मानकर एससी के प्रमाण पत्र जारी करने पर तत्काल रोक लगाई जाए। दो अप्रैल 2018 के प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर रासुका लगाई गई है, उनसे मुकदमे वापस लेकर रिहा किया जाए। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि हम किसी जाति को आरक्षण देने के विरोधी नहीं है। विधिवत तरीके से आरक्षण दें, बैकडोर के जरिये खेल न किया जाए। प्रदर्शन को खटीक महासभा के श्रवण मोघा, वाल्मीकि क्रांति दल के दीपक गंभीर, बामसेफ के फूल कुमार, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के जी सिंह, शहीद ऊधम सिंह सेना के प्रदीप कुमार, एससी वेलफेयर एसोसिएशन के जयप्रकाश नागौरिया, डॉ भीमराव आंबेडकर बौद्ध ट्रस्ट के बाबू सिंह बौद्ध, अखिल भारतीय चमार महासंघ के सुरेंद्र पाल मैनवाल, बहुजन सशक्तिकरण संघ के मित्रसैन, अंबेडकर वेलफेयर के दुष्यंत कुमार, जोगेंद्र, अंबेडकर युवा मंच के राधेश पप्पू, रविदास महासभा के राजकुमार सिद्धार्थ, डॉ पुरुषोत्तम, इंद्रराज सिंह, अमित गौतम, महावीर सिंह आजाद, कस्तूर सिंह स्नेही, मुकेश कुमार, नरेंद्र जयंत, कर्मवीर प्रधान, राकेश कुमार, सुभाष भारती, अरुण कुमार, रूपचंद, धर्मदास, राजबल राणा, अरविंद, नितिन तेजयान, नरेंद्र वाल्मीकि, सागर वाल्मीकि आदि ने विचार रखे। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी तैयारी कर रखी थी। प्रदर्शन करने वाले लोगों से कहीं अधिक पुलिस, पीएसी और अर्द्धसैनिक बल जीआईसी के मैदान में सुबह ही लगा दिए गए थे। सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी सुुबह से लेकर धरना खत्म होने तक जीआईसी के मैदान में ही मौजूद रहे।